भोपाल, 3 अगस्त। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर सोमवार से प्रदेशभर के पटवारी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर चले गए। आंदोलन के पहले दिन सभी जिलों के पटवारियों ने अपने-अपने बस्ते एवं शासकीय अभिलेख संबंधित कार्यालयों में जमा कर दिए तथा शासन के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी वर्षों से लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की।
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल ने बताया कि संघ द्वारा अपनी मांगों के संबंध में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, अपर मुख्य सचिव, राजस्व आयुक्त सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया। इसके बावजूद मांगों पर कोई ठोस एवं सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते प्रदेशभर के पटवारियों को अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा।
उन्होंने कहा कि पटवारियों ने पहले चरणबद्ध आंदोलन के तहत काली पट्टी बांधकर कार्य किया, शासकीय व्हाट्सएप समूहों का बहिष्कार किया तथा ऑनलाइन कार्यों से भी दूरी बनाई, लेकिन शासन स्तर पर कोई सार्थक पहल नहीं होने से अब आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल का रूप दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक प्रदेशभर के पटवारी कलमबंद हड़ताल जारी रखेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष श्री बघेल ने कहा कि हड़ताल के कारण राजस्व विभाग की 12 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित होंगी। इनमें ई-टेकन, वेब जीआईएस, रिकॉर्ड अपडेट, सारा पोर्टल, सारा एप्लिकेशन, आरसीएमएस, सीएम हेल्पलाइन, लघु सिंचाई गणना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े रिकॉर्ड सत्यापन, रिकॉर्ड स्कैनिंग, राजस्व वसूली, फार्मर रजिस्ट्रेशन सहित अनेक ऑनलाइन सेवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, खसरा-खतौनी, गिरदावरी, अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई, कब्जा दिलाने, प्राकृतिक आपदा सर्वेक्षण, कानून-व्यवस्था से जुड़े राजस्व दायित्व तथा अन्य मैदानी एवं कार्यालयीन कार्य भी पूरी तरह प्रभावित होंगे। इसका सीधा असर किसानों, आम नागरिकों तथा राजस्व विभाग की नियमित सेवाओं पर पड़ेगा।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान समय में पटवारियों से लगातार नए-नए ऑनलाइन और मैदानी कार्य कराए जा रहे हैं, जबकि उनकी वर्षों पुरानी मांगें आज भी लंबित हैं। राजस्व विभाग की आधारशिला माने जाने वाले पटवारियों पर सबसे अधिक कार्यभार और जिम्मेदारियां हैं, लेकिन वेतनमान, पदोन्नति और सेवा सुविधाओं के मामले में लगातार उपेक्षा की जा रही है।
उन्होंने बताया कि संघ की प्रमुख मांगों में पटवारी कैडर रिव्यू लागू करना, लंबित नायब तहसीलदार विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित करना, जज प्रोटेक्शन एक्ट की तर्ज पर विधिक संरक्षण प्रदान करना, अतिरिक्त कार्यों का युक्तिकरण कर उसका उचित पारिश्रमिक देना, कर्मचारियों के हितों के अनुरूप पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करना तथा वर्षों से लंबित सभी मांगों का शीघ्र निराकरण शामिल है।
वेतन विसंगति को आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बताते हुए श्री बघेल ने कहा कि वर्तमान में पटवारियों की नियुक्ति ₹2100 ग्रेड पे पर होती है, जबकि नियुक्ति के समय ₹2400 ग्रेड पे दिया जाना चाहिए। इसी प्रकार 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर प्रथम समयमान ₹2400 के स्थान पर ₹2800 ग्रेड पे (राजस्व निरीक्षक के समकक्ष) किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्व निरीक्षक, नायब तहसीलदार एवं तहसीलदार के वेतनमान में ऐसी विसंगति नहीं है, जबकि सबसे अधिक मैदानी कार्य और जवाबदेही पटवारियों पर ही होती है।
मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने शासन से जनहित में शीघ्र निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि यदि सरकार समय रहते मांगों का समाधान करती है तो राजस्व सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो सकेंगी। अन्यथा प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी, जिससे राजस्व विभाग के अधिकांश कार्य प्रभावित होंगे और आम नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।