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आयकर नियम 46(8) के तहत रोजाना बैकअप अनिवार्यता से व्यापारी चिंतित, कैट ने की पुनर्विचार की मांग

हरदा। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आयकर नियम 46(8) के तहत व्यापारियों एवं एमएसएमई सेक्टर के लिए लागू किए गए दैनिक इलेक्ट्रॉनिक बही-खातों के बैकअप और भारत स्थित सर्वरों पर उनके संग्रहण की अनिवार्यता पर गंभीर चिंता जताई है। कैट का कहना है कि यह प्रावधान छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के लिए व्यवहारिक रूप से कठिन और आर्थिक रूप से बोझिल साबित होगा।

कैट के जिला अध्यक्ष सरगम जैन ने कहा कि देश का व्यापारी वर्ग हमेशा से पारदर्शिता, डिजिटलीकरण और कर अनुपालन का समर्थक रहा है। लेकिन 1 अप्रैल 2026 से लागू इस प्रावधान के अनुसार 25 लाख रुपये से अधिक टर्नओवर वाले व्यापारियों को प्रतिदिन अपने इलेक्ट्रॉनिक लेखा-जोखा का बैकअप लेकर उसे भारत स्थित सर्वरों पर सुरक्षित रखना अनिवार्य किया गया है।

उन्होंने कहा कि देश के लगभग 90 प्रतिशत छोटे व्यापारियों के पास कंप्यूटर या अलग आईटी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। वहीं अधिकांश एमएसएमई इकाइयों के पास न तो आईटी विभाग है और न ही ऐसी तकनीकी क्षमता कि वे प्रतिदिन डेटा ट्रांसफर, क्लाउड स्टोरेज, साइबर सुरक्षा और सर्वर प्रबंधन जैसी जटिल प्रक्रियाओं का पालन कर सकें। इससे व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक और प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा।

सरगम जैन ने यह भी कहा कि व्यापारिक खातों में ग्राहकों, सप्लायरों, मूल्य निर्धारण, लाभ मार्जिन और व्यावसायिक रणनीतियों जैसी अत्यंत संवेदनशील जानकारी होती है। प्रतिदिन संपूर्ण डेटा ट्रांसफर की अनिवार्यता से डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और साइबर दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ सकता है।

कैट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस प्रावधान पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा है कि छोटे व्यापारियों एवं एमएसएमई क्षेत्र के लिए सरल, व्यवहारिक और व्यापार-अनुकूल व्यवस्था लागू की जाए, ताकि व्यापारी बिना अतिरिक्त बोझ के देश की अर्थव्यवस्था में अपना प्रभावी योगदान देते रहें।

व्यापारी वर्ग ने आशा व्यक्त की है कि केंद्र सरकार उनकी व्यावहारिक कठिनाइयों और भावनाओं को समझते हुए व्यापार हित में उचित निर्णय लेगी।

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