ऑनलाइन दवा बिक्री को बताया जनस्वास्थ्य के लिए खतरा
केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि कई ऑनलाइन दवा मंच बिना पर्याप्त सत्यापन के दवाइयों की बिक्री कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक ही डॉक्टर के पर्चे का बार-बार उपयोग किया जा रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फर्जी पर्चों के जरिए एंटीबायोटिक व नशीली दवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इससे रोगाणुरोधी प्रतिरोधक क्षमता में कमी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या बढ़ने की आशंका जताई गई है।
भारी छूट से छोटे व्यापारियों पर असर
जिला कैमिस्ट एसोसिएशन ने कहा कि बड़ी ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स के कारोबार को प्रभावित कर रही हैं। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों में संचालित दवा दुकानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। संगठन का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में आम लोगों को स्थानीय स्तर पर दवाइयों की उपलब्धता में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कोविड कालीन अधिसूचना वापस लेने की मांग
संगठन ने कोविड-19 के दौरान जारी अधिसूचना जी.एस.आर. 220(ई) को तत्काल वापस लेने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि यह अधिसूचना अस्थायी व्यवस्था के तहत लागू की गई थी, लेकिन अब तक जारी रहने से दवा नियमों के प्रावधान कमजोर पड़ रहे हैं और ऑनलाइन मंच इसका लाभ उठा रहे हैं।
20 मई को बंद रहेगा दवा कारोबार
जिला कैमिस्ट एसोसिएशन ने बताया कि 20 मई को जिले सहित देशभर में मेडिकल स्टोर्स बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए सख्त नियम लागू करने और अवैध ऑनलाइन दवा कारोबार पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।