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फर्जी वारिस बनकर 2 हेक्टेयर जमीन हड़पने का खेल उजागर, EOW ने सरपंच, सचिव, पटवारी और तहसीलदार समेत 5 पर दर्ज किया मामला

मृत व्यक्ति का पुत्र बनकर कराया नामांतरण, कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर हड़प ली थी कृषि भूमि; भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराओं में कार्रवाई

भोपाल/नीमच। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने नीमच जिले के रामपुरा तहसील अंतर्गत ग्राम बैंसला में मृत व्यक्ति का फर्जी वारिस बनकर कृषि भूमि हड़पने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सरपंच, सचिव, पटवारी, तहसीलदार तथा मुख्य आरोपी सहित अन्य के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने आपसी षड्यंत्र के तहत मृतक केदार मीणा की करीब दो हेक्टेयर कृषि भूमि पर कब्जा दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और राजस्व अभिलेखों में अवैध रूप से नामांतरण करा दिया।

EOW मुख्यालय भोपाल में दर्ज शिकायत क्रमांक 772/25 की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई। सत्यापन में आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाने पर मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई है।

ऐसे रचा गया जमीन हड़पने का षड्यंत्र

जांच के अनुसार ग्राम बैंसला निवासी भगवान मीणा पिता भेरूलाल मीणा ने मृतक केदार पिता धूरा की कृषि भूमि का मालिक बनने के लिए स्वयं को उसका पुत्र और एकमात्र वैध वारिस साबित करने की साजिश रची। इसके लिए उसने अपने पिता का नाम बदलकर मृतक केदार का पुत्र होने का दावा किया।

आरोप है कि इस षड्यंत्र में ग्राम पंचायत बैंसला की तत्कालीन सरपंच श्रीमती प्रेमलता अमर रावत तथा सचिव आनंद सक्सेना ने सहयोग करते हुए भगवान मीणा के पक्ष में असत्य वारिसान प्रमाण पत्र जारी किया। इसके बाद फौती नामांतरण कराने के लिए तहसील कार्यालय रामपुरा में आवेदन प्रस्तुत किया गया।

मामले को आगे बढ़ाने के लिए तत्कालीन पटवारी अनुराग पाटीदार ने भगवान मीणा को मृतक केदार का वैध पुत्र और वारिस दर्शाते हुए असत्य वंशावली, पंचनामा तथा प्रतिवेदन तैयार कर प्रकरण में संलग्न किए।

तहसीलदार ने बिना जांच के कर दिया नामांतरण

EOW की जांच में सामने आया कि तत्कालीन तहसीलदार रामपुरा बालकृष्ण (बी.के.) मकवाना ने मृतक के वास्तविक वारिसों की जांच किए बिना ही प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को सही मान लिया। उन्होंने वारिसान प्रमाण पत्र, वंशावली, पंचनामा और प्रतिवेदन के आधार पर भगवान मीणा के पक्ष में फौती नामांतरण का आदेश पारित कर दिया।

इसके परिणामस्वरूप मृतक केदार मीणा की भूमि का नामांतरण भगवान मीणा के नाम दर्ज हो गया और राजस्व रिकॉर्ड में उसे सहखातेदार तथा भूमिस्वामी के रूप में दर्ज कर लिया गया।

वैध वारिसों को पहुंचाई हानि

जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका उपयोग असली दस्तावेजों की तरह किया। इस कार्रवाई से जहां भगवान मीणा को अवैध लाभ पहुंचा, वहीं मृतक के वास्तविक और वैध वारिसों को आर्थिक एवं कानूनी नुकसान उठाना पड़ा।

EOW ने माना है कि आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर धोखाधड़ी, कूटरचना और पद के दुरुपयोग के माध्यम से राजस्व अभिलेखों में अवैध परिवर्तन कराया।

इन आरोपियों पर दर्ज हुआ मामला

1. भगवान मीणा, पिता भेरूलाल मीणा, निवासी ग्राम बैंसला, तहसील रामपुरा, जिला नीमच।

2. श्रीमती प्रेमलता अमर रावत, तत्कालीन सरपंच, ग्राम पंचायत बैंसला, तहसील रामपुरा, जिला नीमच।

3. आनंद सक्सेना, तत्कालीन सचिव, ग्राम पंचायत बैंसला, तहसील रामपुरा, जिला नीमच।

4. अनुराग पाटीदार, तत्कालीन पटवारी, ग्राम बैंसला, तहसील रामपुरा, जिला नीमच।

5. बी.के. (बालकृष्ण) मकवाना, तत्कालीन तहसीलदार, रामपुरा, जिला नीमच।

6. प्रकरण में संलिप्त अन्य व्यक्ति।

इन धाराओं में दर्ज हुआ अपराध

EOW ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है—

  • धारा 420 – धोखाधड़ी
  • धारा 467 – मूल्यवान दस्तावेज की कूटरचना
  • धारा 468 – धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी
  • धारा 471 – कूटरचित दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना
  • धारा 120-बी – आपराधिक षड्यंत्र
  • इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की—
  • धारा 7(ग) – लोकसेवक द्वारा पद का दुरुपयोग कर अनुचित लाभ देना
  • धारा 12 – भ्रष्टाचार संबंधी अपराध में दुष्प्रेरण
  • के तहत भी प्रकरण दर्ज किया गया है।

EOW करेगी त्वरित कार्रवाई

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने मामले को विवेचना में लेकर आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। एजेंसी का कहना है कि प्रकरण में उपलब्ध दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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