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पटवारी की आत्महत्या से मचा बवाल : प्रशासन पर घेरा, नायब तहसीलदार मुख्यालय अटैच - रातभर थाने में धरना

मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के आलोट में पटवारी रविशंकर खराड़ी की आत्महत्या ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। घटना के बाद गुस्साए पटवारी मंगलवार रात थाने पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। देर रात से लेकर सुबह तक चला यह प्रदर्शन प्रशासन के खिलाफ बढ़ते आक्रोश का संकेत बन गया।

पटवारियों का कहना है कि मृतक द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट को मृत्यु पूर्व बयान माना जाए और सीधे संबंधित अधिकारियों पर केस दर्ज किया जाए। उनका आरोप है कि खराड़ी ने काम के अत्यधिक दबाव और मानसिक प्रताड़ना के चलते यह कदम उठाया।

मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी और अन्य अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन पटवारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। उनका साफ कहना था कि यदि किसी पटवारी पर आरोप होता तो तुरंत कार्रवाई होती, लेकिन इस मामले में प्रशासन ढिलाई बरत रहा है।

⚖️ राजनीतिक एंट्री से बढ़ा दबाव

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार और जयस से जुड़े नेताओं ने धरने में पहुंचकर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि न्याय नहीं मिला तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

📌 प्रशासन का पहला एक्शन

बढ़ते दबाव के बीच कलेक्टर मिशा सिंह ने नायब तहसीलदार सविता राठौर को आलोट से हटाकर रतलाम मुख्यालय अटैच कर दिया है। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि सिर्फ अटैचमेंट से काम नहीं चलेगा—सस्पेंशन और एफआईआर जरूरी है।

🧾 क्या है पूरा मामला?

रविशंकर खराड़ी ने मंगलवार को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले एक पत्र सामने आया, जिसमें उन्होंने नायब तहसीलदार सविता राठौर पर काम का दबाव और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। बताया गया कि इसी वजह से वह अपने भाई की शादी में भी शामिल नहीं हो सके।

💔 परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक के परिवार में गर्भवती पत्नी और चार साल की बेटी समेत अन्य सदस्य हैं। घर में शादी का माहौल मातम में बदल गया। पूरा परिवार सदमे में है।

⚠️ चेतावनी

पटवारियों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो कामकाज ठप कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कह रहा है।

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