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"पटवारियों का फूटा गुस्सा: ‘दबाव, बिना भुगतान और अव्यवस्थाओं से त्रस्त’, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी"


छतरपुर। जिले के पटवारियों पर लगातार बढ़ रहे प्रशासनिक दबाव, लंबित मानदेय, फार्मर आईडी में तकनीकी खामियों और वर्षों से लंबित सेवा संबंधी मामलों को लेकर मध्यप्रदेश पटवारी संघ, जिला शाखा छतरपुर ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में पटवारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा तथा समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो पटवारी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष रामकुमार अवस्थी, कार्यकारी जिलाध्यक्ष अरविंद पटेल और जिला सचिव देवराज अहिरवार के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि जिले के पटवारी पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ते कार्यभार और विभागीय दबाव के कारण वे गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

फार्मर आईडी के नाम पर बढ़ता दबाव

ज्ञापन में बताया गया कि पटवारियों को फार्मर आईडी के साथ-साथ कृषि जनगणना, लघु सिंचाई संगणना, सीमांकन और सीएम हेल्पलाइन जैसे अनेक कार्य करने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद फार्मर आईडी बनाने को लेकर उन पर अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है।

संघ का आरोप है कि फार्मर आईडी का कार्य सीएससी और एमपी ऑनलाइन के माध्यम से किया जा रहा है, जिन्हें इसके लिए भुगतान भी मिल रहा है, लेकिन इसके बावजूद पटवारियों को अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ रहा है। पोर्टल में भी कई तकनीकी खामियां हैं, जिनमें खातेदार और सह-खातेदार का अलग-अलग नहीं दिखना, निवास संबंधी त्रुटियां, डेटा एंट्री में गड़बड़ियां, फार्मर आईडी बनने के बाद भी पेंडिंग सूची में नाम बने रहना, कई किसानों के लिए पोर्टल पर सुविधा उपलब्ध न होना, आधार से मोबाइल नंबर लिंक न होने और ओटीपी संबंधी समस्याएं प्रमुख हैं।

संघ ने मांग की है कि इन तकनीकी खामियों को तत्काल दूर किया जाए और अनावश्यक दबाव बनाकर पटवारियों को प्रताड़ित न किया जाए।

मानदेय भुगतान आज तक नहीं

पटवारी संघ ने ज्ञापन में बताया कि भारत सरकार की स्वामित्व योजना के अंतर्गत जिले में लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इस कार्य के दौरान स्टेशनरी, प्रिंटिंग और अन्य खर्च स्वयं पटवारियों ने वहन किए, जबकि इसका भुगतान पंचायत विभाग द्वारा किया जाना था।

संघ के अनुसार योजना के तहत प्रति ग्राम 7,500 रुपये मानदेय निर्धारित था, लेकिन आज तक भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा कृषि जनगणना और लघु सिंचाई संगणना जैसे कार्यों का मानदेय भी लंबित है, जिससे पटवारियों में नाराजगी बढ़ रही है।

7-8 वर्षों से नहीं लिखा गया सीआर

ज्ञापन में एक और गंभीर मुद्दा उठाते हुए संघ ने कहा कि जिले की विभिन्न तहसीलों में पिछले 7 से 8 वर्षों से अनेक पटवारियों का गोपनीय चरित्रावली (CR) नहीं लिखा गया है। इससे पदोन्नति और अन्य सेवा लाभ प्रभावित हो रहे हैं। संघ ने अभियान चलाकर सभी लंबित सीआर तैयार कराने की मांग की है।

समयमान वेतनमान का लाभ देने की मांग

पटवारी संघ ने कहा कि कई पटवारी समयावधि पूर्ण कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक समयमान वेतनमान का लाभ नहीं मिला है। संघ ने मांग की कि विशेष अभियान चलाकर पात्र पटवारियों को तत्काल समयमान वेतनमान प्रदान किया जाए और इसके लिए सीआर की अनिवार्यता समाप्त की जाए।

वन विभाग पर भी लगाए गंभीर आरोप

ज्ञापन में बड़ामलहरा तहसील का उल्लेख करते हुए पटवारी संघ ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा नियमों के अनुसार किए गए सीमांकन मामलों में पटवारियों के खिलाफ दोषपूर्ण तरीके से पीओआर (प्रकरण) दर्ज किए गए हैं। संघ ने ऐसे मामलों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

पहले भी उठाए गए थे मुद्दे, नहीं हुआ समाधान

पटवारी संघ का कहना है कि जिला मुख्यालय में आयोजित जिला परामर्श समिति की बैठकों में भी इन समस्याओं को कई बार उठाया गया था, लेकिन अब तक किसी भी मांग का समाधान नहीं किया गया। इससे पटवारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

आंदोलन की चेतावनी

संघ ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो पटवारी संघ आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा। ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

पटवारियों की प्रमुख मांगें -

  • फार्मर आईडी पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर की जाएं।
  • फार्मर आईडी कार्य को लेकर अनावश्यक दबाव बंद किया जाए।
  • स्वामित्व योजना, कृषि जनगणना एवं लघु सिंचाई संगणना का लंबित मानदेय तत्काल दिया जाए।
  • 7-8 वर्षों से लंबित सीआर तैयार कराई जाए।
  • पात्र पटवारियों को समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाए।
  • वन विभाग द्वारा दर्ज विवादित प्रकरणों को निरस्त किया जाए।

जिले में बढ़ते असंतोष के बीच पटवारी संघ का यह प्रदर्शन प्रशासन के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन और जिला प्रशासन इन मांगों पर कितना और कितनी जल्दी अमल करता है।

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