अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर जैन संतों को आहार देने का जैन समाज में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। जैन मान्यता के अनुसार प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 आदिनाथ भगवान को एक वर्ष आठ दिन के उपवास के पश्चात हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस कुमार ने गन्ने के रस का आहार कराया था। इसी परंपरा का पालन करते हुए इस दिन जैन श्रावक मुनियों एवं आर्यिका माताजी को आहार कराकर स्वयं को धन्य मानते हैं।
इस पुण्य कार्य में जैन समाज के हेमंत जैन, राहुल गंगवाल, निलेश अजमेरा, संजय बजाज, बल्लू जैन, पर्व अजमेरा, चर्चित गंगवाल, हर्षित जैन, अचित जैन, तनिष्क बड़जात्या, उषा बड़जात्या, सरोज बड़जात्या, ज्योति कटनेरा, मनीषा अजमेरा, रेखा अजमेरा, माया जैन, शिखा गंगवाल, रिनी गंगवाल, रूबी जैन सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर भक्ति भाव से सेवा करते हुए धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया।

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