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जिंदा इंसान को सिस्टम ने बताया मृत! सहायता योजना के लिए भटक रहा 59 वर्षीय मजदूर, जनसुनवाई में लगाई गुहार

"साहब, मैं अभी जिंदा हूं... लेकिन आपके पोर्टल ने मुझे मार दिया!"

हरदा। मध्यप्रदेश के हरदा जिले से प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी पोर्टल की बड़ी खामी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जीवित व्यक्ति को सरकारी सिस्टम ने मृत घोषित कर दिया, जिसके कारण वह शासन की सहायता योजना का लाभ लेने से वंचित हो गया। परेशान होकर पीड़ित को जनसुनवाई में पहुंचकर अधिकारियों के सामने अपनी जीवित होने की गुहार लगानी पड़ी।

मामला हरदा जिले की ग्राम पंचायत अहलवाड़ा के निवासी करण सिंह से जुड़ा है। करण सिंह मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना के अंतर्गत आंशिक अपंगता सहायता योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना चाहते थे, लेकिन पोर्टल पर एक हैरान करने वाला संदेश सामने आया।

पोर्टल पर साफ तौर पर लिखा हुआ था कि— "आपके द्वारा चुने गए सदस्य की मृत्यु की जानकारी पोर्टल पर दर्ज है।"

यानी सरकारी रिकॉर्ड में करण सिंह को मृत मान लिया गया था, जबकि वे स्वयं अधिकारियों के सामने उपस्थित होकर अपनी पहचान बता रहे हैं।


पोर्टल की गलती से अटका आवेदन

जनपद पंचायत टिमरनी द्वारा श्रम पदाधिकारी, हरदा को भेजे गए आधिकारिक पत्र में भी स्वीकार किया गया है कि करण सिंह का आवेदन पोर्टल में दर्ज मृत्यु संबंधी जानकारी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

पत्र में बताया गया है कि करण सिंह मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना के तहत आंशिक अपंगता सहायता योजना के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन तकनीकी त्रुटि के चलते उनका आवेदन ऑनलाइन नहीं हो पा रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संबंधित व्यक्ति की आयु वर्तमान में 59 वर्ष है और दिसंबर 2025 में 60 वर्ष पूर्ण होने के बाद उनका संबल पंजीयन स्वतः निरस्त हो जाएगा। ऐसे में यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित हो सकते हैं।


एक क्लिक की गलती, महीनों की परेशानी

डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन सेवाओं के दौर में सरकारी पोर्टलों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। लेकिन जब सिस्टम ही किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आम नागरिक न्याय के लिए कहां जाए?

करण सिंह को अपनी पात्रता साबित करने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जिस व्यक्ति को सहायता की जरूरत है, वही सरकारी त्रुटि सुधारने के लिए संघर्ष कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक जीवित व्यक्ति को मृत दिखाया जा सकता है, तो ऐसी तकनीकी गड़बड़ियों के कारण न जाने कितने लोग योजनाओं से वंचित हो रहे होंगे।


प्रशासन पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • आखिर करण सिंह को मृत घोषित करने वाली जानकारी पोर्टल में किसने दर्ज की?
  • क्या रिकॉर्ड अपडेट करने से पहले कोई सत्यापन नहीं किया गया?
  • यदि व्यक्ति वास्तव में मृत नहीं था तो सिस्टम में ऐसी एंट्री कैसे हो गई?
  • क्या जिले में ऐसे और भी मामले मौजूद हैं?
  • तकनीकी त्रुटियों की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

जनसुनवाई में पहुंचा मामला

सूत्रों के अनुसार करण सिंह ने हरदा जनसुनवाई में पहुंचकर अधिकारियों को बताया कि वे जीवित हैं और पोर्टल में दर्ज गलत जानकारी के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया और संबंधित विभाग को त्रुटि सुधारने के निर्देश दिए गए।

जनपद पंचायत टिमरनी द्वारा भी श्रम विभाग को पत्र लिखकर तकनीकी समस्या के शीघ्र निराकरण का अनुरोध किया गया है ताकि पात्र हितग्राही का आवेदन स्वीकृत हो सके।


सिस्टम की एक गलती, गरीब की बड़ी सजा

सरकारी रिकॉर्ड में एक गलत एंट्री किसी व्यक्ति के लिए कितनी बड़ी मुसीबत बन सकती है, इसका उदाहरण करण सिंह का मामला है। एक ओर सरकार पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पोर्टल की त्रुटियां गरीब और जरूरतमंद लोगों के सामने नई बाधाएं खड़ी कर रही हैं।

अब देखना यह होगा कि हरदा प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और करण सिंह को उनका अधिकार दिला पाता है या नहीं।

"मैं जिंदा हूं, लेकिन सिस्टम मुझे मृत बता रहा है" — करण सिंह की यह पीड़ा सरकारी व्यवस्थाओं की हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

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