समिति का उद्देश्य जिले में उपलब्ध दुर्लभ एवं ऐतिहासिक पांडुलिपियों की पहचान कर उनका संरक्षण एवं डिजिटलीकरण सुनिश्चित करना है। इस अभियान के तहत जैन समाज के प्रबुद्धजनों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा ट्रस्ट पदाधिकारियों से विशेष सहयोग की अपेक्षा की गई है।
ज्ञात हो कि जैन समाज सदियों से आगम साहित्य, ताड़पत्र, दुर्लभ ग्रंथों एवं हस्तलिखित पांडुलिपियों का संरक्षण करता आया है। अनेक मंदिरों, जिनालयों, पुस्तकालयों, ट्रस्टों एवं निजी संग्रहों में आज भी अमूल्य पांडुलिपियाँ सुरक्षित हैं, जो भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
अभियान से जुड़े आलोक जैन ने कहा है कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक धरोहर को भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का राष्ट्रीय दायित्व है। समाज के सभी वर्गों से अपने क्षेत्र में उपलब्ध पांडुलिपियों की जानकारी संकलित कर अभियान में सक्रिय सहभागिता करने का आग्रह किया गया है।
अधिक जानकारी के लिए नागरिक ‘Gyan Bharatam’ मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं तथा अपने जिले की जिला स्तरीय समिति या जिला नोडल अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
अभियान की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई है। समाज के लोगों से इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनने की अपील की गई है।

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