प्रकरण के अनुसार राजेश पाराशर ने 17 दिसंबर 2019 को सिटी थाना हरदा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 17 सितंबर से 13 दिसंबर 2019 के बीच एडवोकेट शेख मुईन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हिंदू देवी-देवताओं के विरुद्ध आपत्तिजनक एवं अभद्र टिप्पणियां कीं तथा भारत माता के संबंध में भी आपत्तिजनक पोस्ट साझा किए, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और शहर का माहौल प्रभावित हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने पक्ष में सात गवाह प्रस्तुत किए। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट वास्तव में आरोपी का ही था। न्यायालय में प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार संबंधित सोशल मीडिया कंपनी ने जानकारी दी कि उक्त अकाउंट पहले ही डिलीट हो चुका है और उसके सर्वर पर उससे संबंधित कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच से भी आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि विवेचना के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य, गवाहों के बयान और तकनीकी प्रमाण आरोपी के विरुद्ध आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उपलब्ध साक्ष्यों में कई महत्वपूर्ण कमियां पाई गईं, जिसके चलते अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा।
बचाव पक्ष की ओर से यह भी दलील दी गई कि यह मामला आरोपी की निजी एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की मंशा से दर्ज कराया गया था। दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हरदा ने एडवोकेट शेख मुईन को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।