पांच में से तीन मांगों पर आदेश जारी, शेष दो के निराकरण के लिए बनेगी संयुक्त समिति जो 90 दिन में करेगी निराकरण
भोपाल। मध्यप्रदेश में पिछले चार दिनों से चल रही पटवारियों की अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आश्वासन के बाद समाप्त हो गई। मुख्यमंत्री ने भोपाल स्थित स्टेट हेंगर में मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए उनकी मांगों के शीघ्र निराकरण का भरोसा दिलाया। इसके बाद पटवारी संघ ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पटवारी संघ को आश्वस्त करते हुए कहा कि संघ की पांच प्रमुख मांगों में से तीन मांगों के संबंध में शासन द्वारा आदेश जारी किए जा चुके हैं। शेष दो मांगों के निराकरण के लिए राजस्व, वित्त एवं सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित की जाएगी। समिति को 90 दिनों की समय-सीमा में मांगों का परीक्षण कर उनका निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति के गठन संबंधी आदेश भी शुक्रवार को ही जारी किए जाएंगे।
पटवारी संघ ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी प्रमुख समस्या रखते हुए कहा कि प्रदेश के पटवारी पिछले करीब 18 वर्षों से पदोन्नति के अवसर से वंचित हैं। पदोन्नति के अवसर बंद होने के कारण बड़ी संख्या में पटवारी परेशान हैं और लंबे समय से इस मांग को शासन के समक्ष उठाते रहे हैं।
इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पटवारियों की विभागीय परीक्षा सहित पदोन्नति से जुड़ी समस्याओं का भी यथासमय निराकरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नायब तहसीलदार पद के लिए विभागीय परीक्षा नवंबर-दिसंबर में कराए जाने की प्रक्रिया पर भी काम किया जा रहा है।
पटवारियों की पदोन्नति और अन्य लंबित मांगों के संबंध में राजस्व, वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग की संयुक्त समिति गठित की जाएगी। समिति 90 दिनों के भीतर पटवारियों की समस्याओं का परीक्षण कर शासन को आवश्यक अनुशंसाएं देगी और मांगों के निराकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद पटवारी संघ ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया। संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन द्वारा मांगों के निराकरण के लिए समय-सीमा तय किए जाने से पटवारियों में सकारात्मक संदेश गया है।
चार दिनों से चली आ रही कलमबंद हड़ताल समाप्त होने के साथ ही प्रदेश में पटवारियों के काम पर लौटने का रास्ता साफ हो गया है। शासन के आश्वासन और प्रस्तावित संयुक्त समिति की कार्रवाई पर अब पटवारी संघ की नजर रहेगी।