पटवारी संघ के तहसील अध्यक्ष सचिन उइके की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि स्वामित्व योजना से संबंधित कार्यों से पृथक रहने के संबंध में प्रदेश स्तर पर निर्णय लिया गया था और इसकी सूचना जिला एवं तहसील स्तर पर भी दी जा चुकी थी। इसके बावजूद पटवारियों पर योजना से जुड़े कार्यों को लेकर दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया गया है।
मोबाइल छीनकर आईडी-पासवर्ड लेने का आरोप
ज्ञापन में 17 सितंबर 2026 की एक घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत जंतीपुर कार्यालय में पटवारी दिनेश तिवारी के साथ एसडीएम शैलेन्द्र चौधरी ने दबावपूर्ण व्यवहार किया। पटवारी संघ का आरोप है कि उन्हें टर्मिनेट करने की धमकी दी गई तथा उनका मोबाइल लेकर आईडी-पासवर्ड प्राप्त कर स्वामित्व योजना से संबंधित कार्य कराया गया।
ज्ञापन के अनुसार, संबंधित पटवारी ने स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते उस समय विरोध नहीं किया और घटना के बाद भय एवं मानसिक तनाव की स्थिति में होने की बात संघ ने कही है। पटवारियों ने इसे कार्यस्थल पर अधिकारी-कर्मचारी के बीच मर्यादित व्यवहार के विपरीत बताते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होने की मांग की है।
पटवारी शशिकांत चौबे के निलंबन पर भी सवाल
पटवारी संघ ने ग्राम आमानाला, पटवारी हल्का नंबर 63, राजस्व निरीक्षक मंडल मंडला के पटवारी शशिकांत चौबे के निलंबन का मामला भी ज्ञापन में उठाया है। संघ का कहना है कि फार्मर आईडी एवं स्वामित्व योजना की प्रगति को आधार बनाकर उन्हें निलंबित किया गया, जबकि ज्ञापन में उनकी फार्मर आईडी प्रगति 41.87 प्रतिशत बताई गई है। संघ का दावा है कि जिले में कई अन्य पटवारियों की प्रगति इससे कम होने के बावजूद उनके विरुद्ध ऐसी कार्रवाई नहीं की गई।
पटवारी संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि शशिकांत चौबे को कारण बताओ नोटिस दिए बिना सीधे निलंबन आदेश दिया गया। संघ ने निलंबन आदेश तत्काल निरस्त करने की मांग की है। ज्ञापन के साथ निलंबन आदेश की छायाप्रति, फार्मर रजिस्ट्री प्रगति रिपोर्ट तथा अन्य दस्तावेज संलग्न किए गए हैं।
21 से 23 सितंबर तक सामूहिक अवकाश की चेतावनी
पटवारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने पूरे मामले में तत्काल संज्ञान लेकर समाधान नहीं किया तो मंडला तहसील के पटवारी शासकीय कार्यों के बहिष्कार का रास्ता अपनाएंगे। ज्ञापन में 21 से 23 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी गई है। साथ ही समस्याओं का निराकरण नहीं होने पर आगे अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है।
पटवारी संघ ने एसडीएम के कथित आचार-व्यवहार और बोलचाल के तरीके पर गंभीर आपत्ति जताते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष रूप से मामले की जांच कराने तथा कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक एवं नियमानुसार व्यवहार सुनिश्चित कराने की मांग की है।
स्वामित्व योजना का विवाद पहले से प्रदेशव्यापी
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी की संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री को लेकर पटवारी संघ पहले से ही विरोध कर रहा है। पटवारियों की मुख्य आपत्ति रजिस्ट्री दस्तावेज में उन्हें निष्पादक/विक्रेता की भूमिका में रखे जाने को लेकर है। 18 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार भोपाल सहित कुछ जिलों में पटवारियों के विरोध के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
इस पूरे विवाद के बीच मंडला में सामने आया कथित दुर्व्यवहार का मामला अब प्रशासन और पटवारी संघ के बीच टकराव को और बढ़ा सकता है। हालांकि ज्ञापन में लगाए गए आरोप पटवारी संघ के पक्ष से हैं; एसडीएम या जिला प्रशासन का पक्ष इस समय उपलब्ध दस्तावेजों में शामिल नहीं है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही उनकी पुष्टि हो सकेगी।
**पटवारी संघ की मांग है कि मामले में जिला प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे, निलंबन की कार्रवाई की समीक्षा हो और अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच संवाद एवं कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।**