Meesho कस्टमर केयर के नाम पर साइबर ठगी का खुलासा, बैतूल पुलिस ने उड़ीसा से आरोपी को दबोचा
बैतूल। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन के साथ साइबर ठगों ने लोगों को ठगने के नए-नए तरीके ईजाद कर लिए हैं। बैतूल में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां Meesho कस्टमर केयर के नाम पर संपर्क कर एक व्यक्ति के मोबाइल में APK फाइल भेजकर उसे हैक किया गया और खाते से 1 लाख 1 हजार 990 रुपये उड़ा लिए गए। मामले की जांच करते हुए बैतूल पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को उड़ीसा से गिरफ्तार कर लिया है।
ऑनलाइन कस्टमर केयर नंबर तलाशना पड़ा भारी
मामला 17 फरवरी 2026 का है। चुनालोमा निवासी बाकेबिहारी पिता अमृतलाल गोहे (42) ने Meesho ऐप से खरीदी गई सामग्री वापस करने के लिए इंटरनेट पर कस्टमर केयर का मोबाइल नंबर तलाशा। इंटरनेट पर मिले नंबर के जरिए उन्होंने कथित कस्टमर केयर से संपर्क किया।
बातचीत के दौरान साइबर ठग ने उन्हें भरोसे में लिया और व्हाट्सएप के माध्यम से एक APK फाइल भेजी। आरोपी ने इस फाइल को खोलने के लिए कहा। जैसे ही फरियादी ने APK फाइल मोबाइल में खोली, उनके मोबाइल की सुरक्षा से छेड़छाड़ कर ठगों ने बैंकिंग और डिजिटल लेन-देन से संबंधित जानकारी तक पहुंच बना ली।
इसके बाद आरोपी ने फरियादी के खाते से UPI के माध्यम से 1,01,990 रुपये का ट्रांजेक्शन कर लिया। खाते से रकम निकलने के बाद फरियादी को साइबर ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने थाना कोतवाली बैतूल में शिकायत दर्ज कराई।
केस दर्ज होते ही शुरू हुई साइबर जांच
फरियादी की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली बैतूल में धारा 318(4), 319(2) और 308 बीएनएस के तहत अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने साइबर सेल की मदद से डिजिटल साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया। पुलिस टीम ने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, तकनीकी इनपुट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच धीरे-धीरे बैतूल से निकलकर उड़ीसा तक पहुंच गई।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध आरोपी की पहचान मोहम्मद आशिफ के रूप में की।
उड़ीसा पहुंची पुलिस टीम, आरोपी गिरफ्तार
पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मोहम्मद आशिफ पिता मो. मुनाजिर (27), निवासी ग्राम हसनपुर, थाना प्लांट साइट, जिला सुंदरगढ़, उड़ीसा को उसके गांव से अभिरक्षा में लिया।
पूछताछ के दौरान पुलिस के मुताबिक आरोपी ने फरियादी के साथ साइबर धोखाधड़ी करने और UPI के जरिए 1,01,990 रुपये का ट्रांजेक्शन कराने की बात स्वीकार की। पुलिस ने आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया।
आरोपी के कब्जे से मोबाइल और नकदी जब्त
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से साइबर अपराध में उपयोग किए जाने वाले सामान के रूप में: एप्पल कंपनी का आईफोन 11 प्रो मोबाइल फोन ओर 25 हजार रुपये नगद जब्त किए हैं।
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने इस तरह की अन्य साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं और उसके नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।
जनता सावधान! कस्टमर केयर के नाम पर हो रही बड़ी ठगी
बैतूल पुलिस की इस कार्रवाई के साथ ही आम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी सामने आई है। साइबर ठग अब बैंक, ई-कॉमर्स कंपनियों, बिजली विभाग, कूरियर कंपनी और अन्य सेवाओं के कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होता है, जब ठग किसी समस्या के समाधान के नाम पर मोबाइल में कोई APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं।
याद रखें—APK फाइल बन सकती है खतरे का दरवाजा
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। खासकर यदि कोई व्यक्ति कस्टमर केयर के नाम पर व्हाट्सएप के जरिए फाइल भेजकर उसे खोलने, इंस्टॉल करने या मोबाइल की अनुमति देने के लिए कहे तो तुरंत बातचीत बंद कर दें।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
1. कस्टमर केयर नंबर Google से आंख बंद करके न लें।
किसी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर हमेशा उसकी आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक ऐप से ही प्राप्त करें।
2. किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर APK इंस्टॉल न करें।
कस्टमर केयर, बैंक या किसी सरकारी विभाग के नाम पर भेजी गई संदिग्ध फाइल आपके मोबाइल और डेटा को खतरे में डाल सकती है।
3. OTP, UPI PIN और बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
वास्तविक कस्टमर केयर प्रतिनिधि के नाम पर भी कोई व्यक्ति आपसे UPI PIN या OTP मांगे तो जानकारी साझा न करें।
4. स्क्रीन शेयर या रिमोट एक्सेस ऐप से बचें।
ठग समस्या ठीक करने के बहाने मोबाइल की स्क्रीन देखने या फोन का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश कर सकते हैं।
5. ठगी होते ही तुरंत कार्रवाई करें।
यदि खाते से रकम निकल जाए तो इंतजार न करें। तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें और संबंधित बैंक को भी सूचना दें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम को रोकने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस साइबर ठगी का खुलासा करने में थाना प्रभारी निरीक्षक देवकरण डेहरिया, उप निरीक्षक राकेश कुमार सरयाम, सहायक उप निरीक्षक अरुण यादव, प्रधान आरक्षक 677 दीपक कटियार, आरक्षक 703 प्रदीप कहार, आरक्षक 310 पंकज नरवरिया एवं साइबर सेल बैतूल की विशेष भूमिका रही।
बैतूल पुलिस की यह कार्रवाई एक बार फिर बताती है कि साइबर ठग भले ही दूसरे राज्य में बैठकर वारदात करें, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस उन तक पहुंच सकती है। वहीं आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सबक यही है—ऑनलाइन किसी भी अनजान नंबर पर भरोसा करने से पहले सत्यापन करें और मोबाइल में भेजी गई संदिग्ध APK फाइल से हमेशा दूरी बनाए रखें।