फार्मर आईडी के लक्ष्य को लेकर प्रदेशभर के पटवारियों पर बढ़ता दबाव, संशोधित लक्ष्य और कार्यवाही निरस्त करने की मांग

फार्मर आईडी के लक्ष्य को लेकर प्रदेशभर के पटवारियों पर बढ़ता दबाव, संशोधित लक्ष्य और कार्यवाही निरस्त करने की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश में वर्तमान समय में चल रहे फार्मर आईडी निर्माण अभियान को लेकर प्रदेशभर के पटवारियों में असंतोष और चिंता बढ़ती जा रही है। शासन स्तर से निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने की बात सामने आ रही है। पटवारियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कार्य करने के दौरान अनेक ऐसी तकनीकी एवं अभिलेखीय विसंगतियां सामने आ रही हैं, जिनके कारण वास्तविक रूप से किए गए कार्य के बावजूद पोर्टल पर प्रगति अपेक्षित रूप से दिखाई नहीं दे रही है।

पटवारी साथियों के अनुसार फार्मर आईडी बनाने के लिए दिए गए लक्ष्य और उसके विरुद्ध तैयार हुई फार्मर आईडी की प्रगति अलग-अलग पोर्टलों पर कई स्थानों पर अलग-अलग दिखाई दे रही है। इसके कारण पटवारी द्वारा किए गए वास्तविक कार्य और प्रशासनिक रिकॉर्ड में प्रदर्शित प्रगति के बीच अंतर उत्पन्न हो रहा है। परिणामस्वरूप जिन पटवारियों द्वारा बड़ी संख्या में किसानों की फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है, वे भी बकाया सूची में दिखाई दे रहे हैं।

तैयार हो चुकी फार्मर आईडी के बावजूद बकाया में नाम

पटवारियों का कहना है कि प्रत्येक ग्राम में ऐसे अनेक किसान सामने आ रहे हैं जिनकी फार्मर आईडी का कार्य पूरा किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित किसान बकाया सूची में प्रदर्शित हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में पटवारी द्वारा किए गए कार्य को पोर्टल पर सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं किया जाना गंभीर समस्या बन गया है।

इसके अलावा गैर-कृषि भूमि के खातेदारों के नाम भी कई जगह बकाया सूची में दिखाई देने की बात कही जा रही है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश शासन के स्वामित्व वाली भूमि, मंदिर एवं देवस्थान की भूमि, संस्थानों अथवा कंपनियों के नाम दर्ज भूमि तथा अन्य ऐसी भूमियां, जिन पर फार्मर आईडी बनाया जाना व्यवहारिक रूप से लागू नहीं होता, वे भी बकाया सूची में शामिल दिखाई दे रही हैं।

पटवारियों का तर्क है कि जब बकाया सूची में ऐसी प्रविष्टियां भी शामिल हैं जिन पर फार्मर आईडी बनाया जाना संभव या आवश्यक नहीं है, तो उन्हें भी कुल लक्ष्य में शामिल करके प्रतिशत निर्धारित करना जमीनी वास्तविकता के अनुरूप नहीं है।

पोर्टल की विसंगतियों का खामियाजा पटवारियों को

फार्मर आईडी अभियान में सामने आ रही तकनीकी एवं डेटा संबंधी विसंगतियों का सीधा प्रभाव पटवारियों पर पड़ रहा है। पटवारियों का कहना है कि वे निर्धारित समय में उपलब्ध संसाधनों के अनुसार लगातार कार्य कर रहे हैं, किसानों से संपर्क कर रहे हैं, दस्तावेजों एवं अभिलेखों की जांच कर रहे हैं तथा आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। इसके बावजूद पोर्टल पर प्रगति कम दिखाई देने के कारण उनसे लगातार जवाब-तलब किया जा रहा है।

स्थिति यह है कि एक ओर पोर्टल की विसंगतियों का समाधान नहीं हो पा रहा है, वहीं दूसरी ओर लक्ष्य पूरा नहीं होने पर पटवारियों को कार्यवाही की चेतावनी दी जा रही है। कई जिलों में कार्यवाही किए जाने की जानकारी सामने आने से प्रदेशभर के पटवारियों में और अधिक चिंता एवं असुरक्षा का वातावरण बन गया है।

नीमच जिले से उठाया गया मामला

इस समस्या को लेकर नीमच जिले के पटवारियों द्वारा जिला प्रशासन के समक्ष भी स्थिति से अवगत कराया गया है। बताया गया है कि कलेक्टर महोदय को फार्मर आईडी की प्रगति, बकाया सूची तथा पोर्टल पर दिखाई दे रही विसंगतियों के संबंध में जानकारी दी गई है। इसके साथ ही भू-अभिलेख स्तर से भी आयुक्त, भू-अभिलेख को पत्राचार कर समस्या से अवगत कराने की प्रक्रिया की गई है।

इसके बावजूद यदि वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य में संशोधन नहीं किया जाता है, तो पटवारियों पर लगातार बढ़ता दबाव उनके लिए गंभीर कार्यगत समस्या बन सकता है।

रतलाम जिले के विरोध को प्रदेशभर से समर्थन की मांग

फार्मर आईडी के लक्ष्य और कार्यवाही के विरोध में रतलाम जिले में जिस प्रकार से आवाज उठाई जा रही है, उसे प्रदेशभर के पटवारी संगठनों एवं पटवारी साथियों द्वारा समर्थन दिए जाने की मांग उठ रही है। पटवारियों का कहना है कि यह किसी एक जिले की समस्या नहीं है, बल्कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में जमीनी स्तर पर समान परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं।

ऐसे में समस्या का समाधान भी जिला स्तर पर अलग-अलग प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर पर सामूहिक रूप से शासन के समक्ष रखा जाना आवश्यक है। पटवारी संगठनों द्वारा प्रदेश स्तर पर ज्ञापन प्रस्तुत कर फार्मर आईडी के लक्ष्य को वास्तविक कार्यक्षमता एवं उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर संशोधित करने की मांग की जानी चाहिए।

पूर्व में की गई कार्यवाही वापस लेने की मांग

पटवारियों की एक प्रमुख मांग यह भी है कि फार्मर आईडी के लक्ष्य को पूरा नहीं करने अथवा पोर्टल पर कम प्रगति दिखाई देने के आधार पर जिन पटवारियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई है, उन मामलों की पुनः समीक्षा की जाए तथा वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी कार्यवाहियों को निरस्त किया जाए।

पटवारियों का कहना है कि तकनीकी त्रुटि, गलत या अनुपयुक्त खातेदारों का बकाया सूची में शामिल होना तथा अलग-अलग पोर्टल पर आंकड़ों की भिन्नता जैसी परिस्थितियां कर्मचारी के नियंत्रण से बाहर हैं। इसलिए ऐसी परिस्थितियों के लिए किसी कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

मानसिक तनाव में काम कर रहे पटवारी

लगातार लक्ष्य, समीक्षा बैठक, अधिकारियों के दबाव और कार्यवाही की चेतावनियों के बीच प्रदेशभर के पटवारियों पर मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है। पटवारी पहले से ही राजस्व संबंधी अनेक महत्वपूर्ण कार्यों के साथ-साथ शासन की विभिन्न योजनाओं और अभियानों में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे में किसी तकनीकी अथवा पोर्टल संबंधी समस्या के कारण अतिरिक्त दबाव बनाया जाना उनके कार्य को और कठिन बना रहा है।

पटवारियों का कहना है कि वे शासन की योजनाओं और डिजिटल सेवाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो वास्तविक एवं व्यावहारिक परिस्थितियों पर आधारित हो। कर्मचारियों से अपेक्षा की जाए कि वे गुणवत्तापूर्ण और सही कार्य करें, न कि केवल पोर्टल पर प्रतिशत बढ़ाने के लिए ऐसे खातेदारों को भी लक्ष्य में शामिल करें जिनके मामले में फार्मर आईडी बनाना आवश्यक या संभव नहीं है।

प्रदेश स्तर पर समाधान की जरूरत

फार्मर आईडी निर्माण अभियान सरकार की महत्वपूर्ण पहल है और पटवारी वर्ग इसके सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। लेकिन अभियान की सफलता तभी संभव है जब जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की वास्तविक समस्याओं को भी समझा जाए।

प्रदेशभर के पटवारियों की मांग है कि शासन एवं वरिष्ठ अधिकारी पोर्टल पर प्रदर्शित आंकड़ों और वास्तविक रूप से किए गए कार्य का मिलान करवाएं। गैर-कृषि भूमि, शासकीय भूमि, देवस्थान एवं मंदिर भूमि, संस्थागत एवं कंपनी की भूमि तथा अन्य अपात्र खातों को बकाया लक्ष्य से अलग किया जाए। जिन किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है, उनके नाम बकाया सूची से स्वतः हटाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा विभिन्न पोर्टलों पर दिखाई दे रहे आंकड़ों में एकरूपता लाई जाए।

साथ ही, जब तक इन तकनीकी एवं अभिलेखीय विसंगतियों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक लक्ष्य आधारित दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

सामूहिक पहल का आह्वान

प्रदेश के पटवारी साथियों से अपील की जा रही है कि वे इस समस्या को किसी एक जिले अथवा किसी एक व्यक्ति की समस्या न मानकर प्रदेशभर के पटवारियों की साझा समस्या के रूप में देखें। रतलाम जिले में उठ रही आवाज को समर्थन देते हुए प्रदेश स्तर पर एकजुट होकर शासन के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत किया जाए और फार्मर आईडी के लक्ष्य को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करवाने की पहल की जाए।

साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों में फार्मर आईडी के संबंध में जिन पटवारियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई है, उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा करवाकर कार्यवाही निरस्त करवाने की मांग भी मजबूती से रखी जाए।

पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल का कहना है कि वे काम से पीछे हटना नहीं चाहते, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें वास्तविक कार्य का सही मूल्यांकन हो। तकनीकी खामियों और पोर्टल की विसंगतियों का बोझ कर्मचारी पर डालने के बजाय शासन को पहले व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए। फार्मर आईडी अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन और पटवारी वर्ग के बीच टकराव नहीं, बल्कि सहयोग और व्यावहारिक समाधान की आवश्यकता है।

प्रदेशभर के पटवारियों की यही अपेक्षा है कि शासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए वास्तविक स्थिति का परीक्षण करे, अव्यावहारिक लक्ष्य में संशोधन करे, पोर्टल की विसंगतियों को दूर करे और अनावश्यक दबाव एवं कार्यवाही से पटवारी वर्ग को राहत प्रदान करे।

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