हरदा निवासी शांति कुमार जैसानी ने इस मुद्दे को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब किराए में इतनी बड़ी वृद्धि हुई है तो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से अपेक्षित स्तर पर आवाज क्यों नहीं उठाई जा रही है। उनका कहना है कि विपक्ष की ओर से सोशल मीडिया और मोबाइल के माध्यम से बयान तो सामने आ रहे हैं, लेकिन जनता के बीच जाकर इस समस्या को लेकर कोई प्रभावी आंदोलन दिखाई नहीं दे रहा।
जैसानी ने कहा कि यदि राजनीतिक दल इस मुद्दे पर गंभीरता से सामने नहीं आते हैं तो हरदा के किसान, व्यापारी, छात्र और आम नागरिक मिलकर निजी बसों के बढ़े हुए किराए के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। उनका कहना है कि परिवहन जैसी मूलभूत सुविधा का खर्च अचानक इतना बढ़ जाना आम परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में सवाल किया कि “क्या सच में हमारी बात सही साबित हो रही है कि गंगाधर ही शक्तिमान है?” उनका संकेत इस बात की ओर है कि यदि जनता से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष दोनों खामोश रहें, तो आम नागरिकों को स्वयं अपनी आवाज उठानी पड़ेगी।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को लेकर भी सवाल
इसी मुद्दे पर शैलेंद्र पटनी ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत 1 अगस्त से बड़े शहरों से विभिन्न स्थानों के लिए बस सेवा शुरू किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन इसका संचालन फिलहाल टल गया है। अब बढ़े हुए निजी बस किराए के बीच इस योजना के सितंबर में, लगभग 11-12 सितंबर के आसपास शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
पटनी का कहना है कि यदि सरकार की प्रस्तावित परिवहन सेवा समय पर और पर्याप्त संख्या में शुरू होती है तो यात्रियों को निजी बसों पर निर्भरता से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, योजना के वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके शुरू होने और उसके बाद सेवा के विस्तार के आधार पर ही किया जा सकेगा।
रेलवे की समय-सारिणी पर भी उठ रहे सवाल
निजी बस किराए के साथ-साथ क्षेत्र में रेल परिवहन को लेकर भी यात्रियों की परेशानियां सामने आ रही हैं। शैलेंद्र पटनी के अनुसार, आसपास के शहरों और कस्बों के बीच दैनिक यात्रियों की जरूरत के मुताबिक ट्रेनों की समय-सारिणी नहीं होने से लोगों को बसों पर निर्भर रहना पड़ता है।
उनका कहना है कि दो ट्रेनों के बीच कई बार लंबा अंतराल रहता है। ऐसे समय में यदि रेलवे स्थानीय यात्रियों की सुविधा के लिए मेमू अथवा पैसेंजर ट्रेन का संचालन करे तो बड़ी संख्या में यात्रियों को राहत मिल सकती है।
खंडवा-भोपाल मेमू की मांग अभी भी अधूरी
पटनी ने दावा किया कि लगभग चार-पांच वर्ष पूर्व खंडवा-भोपाल के बीच मेमू ट्रेन चलाने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दी है। उनका कहना है कि इसके लिए आए रेक का उपयोग बाद में इटारसी-भुसावल-इटारसी के बीच चलने वाली सेवा में किया जा रहा है और यात्रियों से एक्सप्रेस श्रेणी का किराया लिया जा रहा है।
यदि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त संख्या में मेमू या पैसेंजर ट्रेनों का संचालन किया जाए और समय-सारिणी दैनिक यात्रियों की जरूरत के अनुसार तैयार की जाए, तो सड़क परिवहन पर दबाव कम हो सकता है। इससे निजी बस किराए में वृद्धि का असर भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
जनता के सामने बड़ा सवाल
मामला केवल बस किराए में वृद्धि का नहीं है। यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि आम यात्रियों के लिए सस्ता, सुगम और नियमित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी है। एक ओर निजी बसों के बढ़े हुए किराए से यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्याप्त वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं होने से लोगों के पास महंगा किराया देने के अलावा सीमित विकल्प रह जाते हैं।
हरदा सहित आसपास के क्षेत्रों में रोजाना यात्रा करने वाले लोगों की मांग है कि प्रशासन और संबंधित विभाग बढ़े हुए बस किराए की जांच करें, किराया निर्धारण की प्रक्रिया को स्पष्ट करें और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो कार्रवाई की जाए। साथ ही रेलवे से भी दैनिक यात्रियों की जरूरत के अनुसार ट्रेनों की समय-सारिणी और स्थानीय ट्रेन सेवाओं में सुधार की मांग उठ रही है।
अब देखना होगा कि सरकार, परिवहन विभाग, रेलवे और राजनीतिक दल इस बढ़ते जन असंतोष को कितनी गंभीरता से लेते हैं। यदि समय रहते यात्रियों को राहत नहीं मिली तो हरदा में किसान, व्यापारी, विद्यार्थी और आम नागरिकों के स्तर पर इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।