नई व्यवस्था में 21 दिन के भीतर पंजीयन से लेकर दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों तक के लिए अलग-अलग प्राधिकरण निर्धारित
जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण को लेकर लागू नई व्यवस्था में समय-सीमा के आधार पर पंजीयन की प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत जन्म अथवा मृत्यु की घटना के 21 दिन के भीतर पंजीयन कराना सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत रहेगा, जबकि विलंब होने पर अलग-अलग स्तर के अधिकारियों की अनुमति अथवा आदेश आवश्यक होगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 21 दिन के भीतर जन्म या मृत्यु होने पर यदि घटना सरकारी अस्पताल में हुई है तो संबंधित अस्पताल द्वारा पंजीयन प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। वहीं, घर अथवा निजी अस्पताल में हुई घटना के मामले में संबंधित स्थानीय निकाय द्वारा पंजीयन की कार्रवाई की जाएगी।
यदि जन्म अथवा मृत्यु के पंजीयन में 21 दिन से अधिक और एक वर्ष तक का विलंब होता है, तो जिला सांख्यिकी अधिकारी के अनुमोदन/आदेश के उपरांत पंजीयन कराया जा सकेगा।
इसी प्रकार एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष के भीतर पंजीयन कराने के लिए तहसीलदार के आदेश की आवश्यकता होगी। वहीं, दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म अथवा मृत्यु के पंजीयन के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी न्यायाधीश) के आदेश के बाद पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं का समयबद्ध एवं व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करना तथा विलंब से होने वाले पंजीकरण के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी और प्रक्रिया निर्धारित करना है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि जन्म अथवा मृत्यु का पंजीयन निर्धारित समय-सीमा में ही कराएं, ताकि बाद में अतिरिक्त अनुमति अथवा न्यायिक आदेश की प्रक्रिया से बचा जा सके।