राजस्व निरीक्षक संघ प्रांताध्यक्ष हेमंत गोस्वामी के अनुसार वर्तमान में नायब तहसीलदार की सीमित भर्ती परीक्षा के 538 पदों तथा राजस्व निरीक्षक से पदोन्नति के 22 पदों को छोड़कर बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। इसी प्रकार नायब तहसीलदार (भू-संसाधन प्रबंधन) के 69 पदों पर सीधी भर्ती तथा राजस्व निरीक्षक से पदोन्नति के 43 पद रिक्त बताए गए हैं। संघ का कहना है कि इन पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने से लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे राजस्व निरीक्षकों को लाभ मिल सकेगा।
ज्ञापन में राजस्व निरीक्षक संघ ने मांग की है कि नियमों में संशोधन करते हुए नायब तहसीलदार के पदों पर सीधी भर्ती के बजाय वर्तमान में एक बार के लिए राजस्व निरीक्षकों से पदोन्नति की जाए। संघ ने इसके कई लाभ भी बताए हैं। पदोन्नति होने से भविष्य में नायब तहसीलदार के पद सीधी भर्ती से भरे जा सकेंगे, वहीं वर्तमान राजस्व निरीक्षक संवर्ग के कर्मचारियों को उनकी सेवाकालीन वरिष्ठता का लाभ मिल सकेगा। संघ का यह भी तर्क है कि वर्तमान में अधिकांश राजस्व निरीक्षक नायब तहसीलदार के समकक्ष वेतन लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जिससे पदोन्नति होने पर शासन पर अतिरिक्त वित्तीय भार न्यूनतम रहेगा।
संघ ने पदोन्नति सूची में दिव्यांग, पदच्युत, सेवानिवृत्त एवं पदोन्नत राजस्व निरीक्षकों के नामों को विलोपित करते हुए शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार वरिष्ठता का निर्धारण करने की मांग भी की है।
इसके साथ ही संघ ने मांग रखी है कि यदि पदोन्नति के बाद भी कुछ राजस्व निरीक्षक शेष रह जाते हैं तो संवर्ग की पूर्व लंबित मांग के अनुसार स्टेशनरी भत्ता 2500 रुपये एवं अतिरिक्त सर्किल भत्ता 10 हजार रुपये सहित अन्य सुविधाओं को वर्तमान महंगाई के अनुरूप पुनर्निर्धारित किया जाए।
संघ ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि यदि राजस्व निरीक्षकों की पदोन्नति संभव नहीं होती है तो नायब तहसीलदार (भू-संसाधन एवं प्रबंधन) के स्वीकृत पदों की तर्ज पर नायब तहसीलदार के सीधी भर्ती वाले स्वीकृत पदों में से 75 प्रतिशत पद राजस्व निरीक्षकों की पदोन्नति के लिए निर्धारित किए जाएं, ताकि कम समयावधि में संवर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल सके।
ज्ञापन के माध्यम से मध्यप्रदेश राजस्व निरीक्षक संघ ने शासन से राजस्व निरीक्षक संवर्ग की उक्त मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र पदोन्नति प्रदान करने की मांग की है।