पटवारियों को फोन कर फर्जी अटैचमेंट आदेश के नाम पर ठगी की कोशिश

पटवारियों को फोन कर फर्जी अटैचमेंट आदेश के नाम पर ठगी की कोशिश

ग्वालियर भू-अभिलेख कार्यालय का कर्मचारी बनकर भेजा फर्जी आदेश, नाम हटाने के एवज में मांगे 15 हजार रुपए; पटवारियों को सतर्क रहने की अपील

इंदौर। जिले के कुछ पटवारियों को अज्ञात मोबाइल नंबरों से फोन और व्हाट्सऐप संदेश भेजकर साइबर ठगी का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। ठगों द्वारा खुद को ग्वालियर भू-अभिलेख कार्यालय का कर्मचारी बताते हुए पटवारियों को छह माह के लिए ग्वालियर अटैच किए जाने की बात कही जा रही है। इसके बाद फर्जी आदेश भेजकर कार्रवाई से नाम हटाने के एवज में 15 हजार रुपए की मांग की जा रही है।

जानकारी के अनुसार 9893790706 और 7879631446 मोबाइल नंबरों से पटवारी साथियों को संपर्क किया गया है। एक पटवारी को व्हाट्सऐप पर संजीव कुमार नामक व्यक्ति का संदेश आया। उसने स्वयं को ग्वालियर भू-अभिलेख कार्यालय का बाबू बताते हुए कहा कि संबंधित पटवारी को बंदोबस्त एवं सारा ऐप के कार्य के लिए छह माह के लिए ग्वालियर अटैच किया जा रहा है।

ठग ने विश्वास में लेने के लिए एक कथित आदेश भी व्हाट्सऐप पर भेजा। हालांकि आदेश को देखने के बाद उसकी भाषा और प्रारूप में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित पटवारी को उसके फर्जी होने का संदेह हुआ। इसके बाद जब फोन करने वाले से कुछ सवाल किए गए तो पूरा मामला साइबर फ्रॉड की कोशिश के रूप में सामने आया। बताया गया कि ठगों ने नाम हटाने अथवा कार्रवाई से बचाने के नाम पर 15 हजार रुपए की मांग की थी।

पटवारियों की व्यक्तिगत जानकारी भी ठगों के पास

इस मामले में सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि ठगों के पास संबंधित पटवारियों की पदस्थापना, तहसील और गांव सहित अन्य विभागीय जानकारी उपलब्ध है। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर ठग अधिकारियों-कर्मचारियों को भयभीत कर अपने जाल में फंसाने का प्रयास कर रहे हैं।

पैनिक न हों, पहले आदेश की करें पुष्टि

मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने अन्य कर्मचारियों को सतर्क करते हुए अपील की है कि इस प्रकार के फोन अथवा व्हाट्सऐप संदेश प्राप्त होने पर घबराएं नहीं और किसी भी स्थिति में पैसे का लेन-देन न करें। किसी भी अटैचमेंट, स्थानांतरण या विभागीय आदेश की वास्तविकता संबंधित कार्यालय अथवा सक्षम अधिकारी से सीधे संपर्क कर सुनिश्चित करें।

संदिग्ध व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, दस्तावेज या व्हाट्सऐप संदेश का जवाब देने के बजाय उसकी जानकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों को दें। साथ ही ऐसे मोबाइल नंबरों और संदेशों को सुरक्षित रखते हुए आवश्यक होने पर पुलिस अथवा साइबर अपराध से संबंधित एजेंसी को शिकायत करें।

एक छोटी सी सावधानी बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। विभागीय कर्मचारियों से जुड़ी निजी एवं पदस्थापना संबंधी जानकारी का इस्तेमाल कर ठगी की कोशिश किया जाना गंभीर विषय है, इसलिए सभी पटवारियों एवं अन्य शासकीय कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।



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