स्वामित्व योजना में पटवारी को ‘निष्पादक’ बनाने का विरोध, बोले- अधिकार स्पष्ट करें, कानूनी सुरक्षा दें

स्वामित्व योजना में पटवारी को ‘निष्पादक’ बनाने का विरोध, बोले- अधिकार स्पष्ट करें, कानूनी सुरक्षा दें

पटवारियों ने उठाए सवाल: ड्रोन सर्वे और आबादी रिकॉर्ड में त्रुटि रही तो रजिस्ट्री की जिम्मेदारी किसकी? कैडर रिव्यू समेत लंबित मांगें पूरी करने की मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत आबादी अधिकार अभिलेख के आधार पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया में पटवारियों को ‘डीड ऑफ कन्वेयंस’ के निष्पादक (Executant) की भूमिका दिए जाने को लेकर पटवारी संघ ने आपत्ति जताई है। पटवारियों का कहना है कि योजना के तहत तैयार रिकॉर्ड, ड्रोन सर्वे, नक्शे, प्लॉट निर्धारण और हितग्राही की पहचान में यदि भविष्य में कोई त्रुटि सामने आती है तो उसकी कानूनी जिम्मेदारी मैदानी कर्मचारी पर आ सकती है। ऐसे में शासन को पहले अधिकार, जिम्मेदारी और कानूनी संरक्षण स्पष्ट करना चाहिए।

पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल का कहना है कि उनका विरोध रजिस्ट्री प्रक्रिया या स्वामित्व योजना के खिलाफ नहीं है। आपत्ति इस बात पर है कि जिस अधिकार अभिलेख के आधार पर रजिस्ट्री हो रही है, उसके अंतिम निष्पादन की जिम्मेदारी पटवारी के स्तर पर तय करने से भविष्य में कर्मचारी दीवानी और आपराधिक विवादों में उलझ सकता है।

*‘शासकीय भूमि का मालिक शासन, फिर व्यक्तिगत नाम से निष्पादन क्यों?’*

पटवारियों ने सबसे बड़ा सवाल सरकारी भूमि को लेकर उठाया है। उनका तर्क है कि शासकीय भूमि का स्वामी शासन होता है। ऐसे में यदि किसी प्रक्रिया में शासन की ओर से विलेख निष्पादित किया जाना है तो उसमें मध्यप्रदेश शासन अथवा सक्षम प्राधिकारी/अधिकृत अधिकारी का उल्लेख होना चाहिए, न कि पटवारी का व्यक्तिगत नाम इस तरह सामने आए कि भविष्य में वह स्वयं विलेख का पक्षकार या निष्पादक माना जाए।

पटवारियों का कहना है कि केवल किसी ऑनलाइन वर्कफ्लो या विभागीय प्रक्रिया के आधार पर कर्मचारी से दस्तावेज निष्पादित कराना पर्याप्त नहीं है। यदि शासन ने यह अधिकार पटवारी को दिया है तो इसके लिए स्पष्ट वैधानिक आदेश, जिम्मेदारी की सीमा और कानूनी संरक्षण भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

*रिकॉर्ड में गलती हुई तो कौन जिम्मेदार?*

पटवारी संघ ने स्वामित्व योजना में तैयार अधिकार अभिलेखों की शुद्धता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संघ के अनुसार ड्रोन सर्वे से तैयार नक्शों और आबादी प्लॉटों में कई स्तर पर सुधार की जरूरत सामने आ सकती है। कहीं आबादी की सीमा, कहीं प्लॉट की सीमा और कहीं व्यक्ति के नाम को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है।

पटवारियों का कहना है कि किसी व्यक्ति का नाम रिकॉर्ड में दर्ज हो गया, लेकिन बाद में कोई वास्तविक वारिस या दूसरा दावेदार सामने आया तो विवाद सीधे रजिस्ट्री तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में रजिस्ट्री निरस्तीकरण, हक संबंधी विवाद या अन्य कानूनी कार्रवाई की स्थिति में दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने वाले कर्मचारी से भी जवाब-तलब हो सकता है।

यही वजह है कि संघ सार्वजनिक सत्यापन, आपत्तियों के निराकरण और रिकॉर्ड की अंतिम शुद्धता सुनिश्चित किए बिना रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लक्ष्य आधारित तरीके से आगे बढ़ाने को लेकर चिंतित है।

*अधिकार तय करने का काम सक्षम राजस्व अधिकारी का, निष्पादन पटवारी से क्यों?*

पटवारियों का एक प्रमुख तर्क यह भी है कि पटवारी की मूल भूमिका मैदानी स्तर पर जानकारी, जांच, रिपोर्ट और राजस्व अभिलेखों से संबंधित कार्यों में है। किसी व्यक्ति के स्वामित्व या अधिकार का अंतिम निर्धारण करने की न्यायिक/अर्धन्यायिक शक्ति पटवारी के पास नहीं है।

ऐसे में संघ चाहता है कि अधिकार निर्धारण और विलेख निष्पादन की जिम्मेदारी सक्षम राजस्व अधिकारी स्तर पर स्पष्ट रूप से तय की जाए। पटवारी को सर्वे, स्थल सत्यापन, अभिलेख और आवश्यक सहयोग तक सीमित रखा जाए।

*फार्मर ID के बाद अब 100 दिन में 50 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य*

पटवारियों की चिंता केवल स्वामित्व योजना तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि हाल ही में फार्मर रजिस्ट्री के तहत किसान ID बनाने के लक्ष्य को लेकर मैदानी कर्मचारियों पर लगातार दबाव रहा। अब स्वामित्व योजना में भी बड़ी संख्या में रजिस्ट्री का लक्ष्य दिए जाने से अतिरिक्त कार्यभार बढ़ेगा।

संघ के अनुसार 17 सितंबर से 100 दिनों में 50 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा गया है। पटवारियों का सवाल है कि एक रजिस्ट्री की प्रक्रिया में दस्तावेजों के परीक्षण, हितग्राही की पहचान, रिकॉर्ड मिलान और अन्य औपचारिकताओं में पर्याप्त समय लगता है। ऐसे में लक्ष्य पूरा करने का दबाव बढ़ने पर जल्दबाजी में काम होने और बाद में विवाद खड़े होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

*‘प्रतिशत और टारगेट की दौड़ में कानूनी जोखिम न बढ़े’*

पटवारियों का कहना है कि मैदानी अमले पर पहले से ही गिरदावरी, नामांतरण, सीमांकन, राजस्व प्रकरणों, विभिन्न सर्वेक्षणों, ऑनलाइन अभिलेखों और शासन की योजनाओं का काम है। इसके साथ नई जिम्मेदारियां जोड़ने से काम का बोझ बढ़ रहा है।

संघ की चिंता है कि कहीं ऐसा न हो कि लक्ष्य पूरा करने के लिए कर्मचारी पर दबाव बनाया जाए और बाद में किसी एक रजिस्ट्री में विवाद होने पर उसी कर्मचारी को जिम्मेदार ठहरा दिया जाए।

*जीआईओ टैग गिरदावरी पर भी पहले जताई आपत्ति*

पटवारी संघ ने जियो टैग गिरदावरी की व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि इसके प्रारंभ से ही पटवारी संगठन की मांग रही है कि इसमें व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखा जाए। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि जियो टैग गिरदावरी के दौरान स्थानीय स्तर पर युवाओं को अपनी जिंदगी दांव पर लगाने जैसी घटनाओं का भी सामना करना पड़ा है। संघ की मांग है कि जब तक ऐसी व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक पटवारियों पर इसके माध्यम से अनिवार्य रूप से काम का दबाव नहीं बनाया जाए।

लगातार बढ़ रही जिम्मेदारियां, लंबित हैं कैडर रिव्यू समेत कई मुद्दे - पटवारियों ने अपने ज्ञापन में कहा है कि राजस्व प्रशासन में तकनीकी और मैदानी सहयोग के बावजूद प्रदेश में कई सेवा संबंधी समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं। ग्रेड-पे, कैडर रिव्यू, पदोन्नति/सेवा संबंधी समस्याएं और अन्य लंबित मांगों का भी निराकरण नहीं हुआ है।

संघ का कहना है कि पटवारी संवर्ग से लगातार नई योजनाओं और अतिरिक्त तकनीकी कार्यों में योगदान लिया जा रहा है, लेकिन उसके अनुरूप पद संरचना, संसाधन, प्रशिक्षण और सेवा संबंधी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

*शासन को सौंपे ज्ञापन में क्या मांग?*

  1. पटवारी संघ की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
  2. स्वामित्व योजना में पटवारी को व्यक्तिगत रूप से विलेख का निष्पादक बनाने की व्यवस्था स्पष्ट की जाए।
  3. यदि पटवारी से निष्पादन कराया जाना है तो स्पष्ट वैधानिक आदेश/SOP और कानूनी संरक्षण जारी किया जाए।
  4. ड्रोन सर्वे और अधिकार अभिलेखों का गांव स्तर पर सार्वजनिक सत्यापन कराया जाए।
  5. आपत्ति, वारिसाना विवाद, कब्जे और सीमांकन संबंधी मामलों का पहले निराकरण किया जाए।
  6. विलेख में व्यक्तिगत पटवारी के बजाय शासन/सक्षम अधिकृत अधिकारी की भूमिका स्पष्ट की जाए।
  7. लक्ष्य आधारित कार्य में गुणवत्ता और कानूनी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
  8. कैडर रिव्यू सहित पूर्व में शासन द्वारा दिए गए आश्वासनों को पूरा किया जाए।
  9. फार्मर रजिस्ट्री, गिरदावरी और स्वामित्व योजना जैसी अतिरिक्त जिम्मेदारियों के लिए स्पष्ट कार्य-विभाजन और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

काम से पीछे नहीं हट रहे, लेकिन कानूनी जोखिम अकेले नहीं उठाएंगे’ - पटवारियों का कहना है कि वे शासन की योजनाओं को जमीन पर लागू करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। उनका विरोध केवल ऐसी व्यवस्था से है जिसमें अधिकार और निर्णय किसी और स्तर पर हों, लेकिन विवाद की स्थिति में दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने वाला मैदानी कर्मचारी अकेला जवाबदेह बन जाए।

संघ का कहना है कि शासन यदि स्वामित्व योजना को तेजी से लागू करना चाहता है तो पहले रिकॉर्ड की शुद्धता, अधिकार की स्पष्टता, निष्पादन की वैधानिकता और कर्मचारी की जवाबदेही तय करे। इससे योजना भी सुचारु रूप से चलेगी और भविष्य में हितग्राहियों तथा कर्मचारियों दोनों को अनावश्यक कानूनी विवादों से बचाया जा सकेगा।

अब इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि 15 सितंबर को जारी ज्ञापन में पटवारी संघ ने स्वामित्व योजना के साथ फार्मर ID, जियो टैग गिरदावरी और लंबित सेवा संबंधी मांगों को एक साथ उठाते हुए शासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश और संरक्षण की मांग की है।










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