केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुआवजे की बढ़ी राशि दिलाने के नाम पर मांग रहा था रकम, बाइक की डिग्गी से मिले 47 हजार
पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुआवजा प्रकरण में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। सागर लोकायुक्त की टीम ने गुरुवार को पन्ना में पटवारी संतोष चिकवा को 47 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि पटवारी ने आदिवासी किसान से बढ़ी हुई मुआवजा राशि दिलाने और जरूरी दस्तावेज तैयार कराने के बदले कुल 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम आरोपी की बाइक की डिग्गी से बरामद की गई।
जानकारी के मुताबिक, केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों को पहले 1 लाख 35 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया था। फरियादी दयाराम आदिवासी ने बढ़ी हुई 63 हजार रुपये की मुआवजा राशि प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि इसी बढ़ी हुई राशि को दिलाने की प्रक्रिया के दौरान पटवारी संतोष चिकवा ने किसान से 80 हजार रुपये की मांग की।
पहले 30 हजार दिए, फिर लोकायुक्त से की शिकायत
फरियादी के अनुसार, पटवारी की मांग पर वह पहले 30 हजार रुपये दे चुका था। इसके बाद पटवारी ने शेष 47 हजार रुपये देने के लिए दबाव बनाया। परेशान होकर किसान ने सागर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत कर दी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने के बाद टीम ने पटवारी को रिश्वत लेते पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
गुरुवार को तय योजना के तहत किसान 47 हजार रुपये लेकर पटवारी के संपर्क में पहुंचा। पन्ना के हॉस्पिटल चौक पर जैसे ही रिश्वत की रकम पटवारी तक पहुंची, लोकायुक्त की टीम ने उसे पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी की बाइक की डिग्गी से 47 हजार रुपये बरामद किए गए।
मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर भी पैसे मांगने का आरोप
मुआवजा राशि के अलावा पटवारी पर परिवार में हुई मौतों के मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने के नाम पर भी पैसे मांगने का आरोप है। किसान का आरोप है कि सरकारी प्रक्रिया से जुड़े कामों को कराने के लिए उससे लगातार रकम की मांग की जा रही थी।
पटवारी की गिरफ्तारी के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य तथ्यों की जांच शुरू कर दी है। आरोपी के खिलाफ कोतवाली पन्ना में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
अकेला पटवारी या पीछे कोई और? जांच जारी
पटवारी की गिरफ्तारी के बाद अब लोकायुक्त इस बिंदु की भी जांच कर रही है कि 80 हजार रुपये की कथित रिश्वत की मांग उसने अकेले की थी या इस पूरे मामले में किसी अन्य अधिकारी अथवा कर्मचारी की भी भूमिका थी। जांच में यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
मुआवजा वितरण की व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण बड़ी संख्या में परिवार विस्थापन और मुआवजा प्रक्रिया से जुड़े हैं। ऐसे में मुआवजा राशि बढ़वाने और दस्तावेज तैयार कराने के नाम पर रिश्वत मांगने का मामला सामने आने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग के कामकाज को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पन्ना जिले में इससे पहले भी लोकायुक्त की कार्रवाई में रिश्वतखोरी के मामले सामने आते रहे हैं। ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल लोकायुक्त टीम मामले के सभी पहलुओं की जांच में जुटी है।