कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर रानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन के साथ की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने रानी दुर्गावती के सम्मान में नारे लगाए और उनके शौर्य एवं पराक्रम को याद किया।
कार्यक्रम में वनवासी कृषि एवं ग्रामीण मजदूर संघ जिला हरदा के जिलाध्यक्ष गणेश मर्सकोले ने रानी दुर्गावती के जीवन और उनके संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को दुर्गाष्टमी के दिन कालिंजर के किले में राजा कीर्तिसिंह चंदेल के परिवार में हुआ था। दुर्गाष्टमी के दिन जन्म होने के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया।
उन्होंने बताया कि रानी दुर्गावती की राजधानी सिंगौरगढ़ थी। उनका विवाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह के साथ हुआ था। रानी दुर्गावती ने अपने शासनकाल में अदम्य साहस, वीरता और कुशल युद्ध नीति का परिचय देते हुए गोंडवाना की प्रतिष्ठा को देशभर में स्थापित किया। उनका जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी है।
जयंती कार्यक्रम में रामदास उईके, अनिल धुर्वे, वीरेंद्र खंडे, शंकरलाल धुर्वे, संतोष परते, विक्रम उईके, सुनील धुर्वे, दरबार धुर्वे, शुभम मर्सकोले, शिवनारायण उईके, भगवान राजपूत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने वीरांगना रानी दुर्गावती को श्रद्धापूर्वक नमन किया।