भोपाल। स्वामित्व योजना के तहत किए जा रहे कार्यों को लेकर मध्यप्रदेश के पटवारियों और शासन-प्रशासन के बीच विवाद अब आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। योजना से जुड़े कार्यों का विरोध करने वाले पटवारियों के खिलाफ प्रदेश के विभिन्न जिलों में की गई दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदेशभर के पटवारियों ने बुधवार को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रमुख सचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई वापस लेने की मांग की और विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार शुरू कर दिया।
पटवारियों का आरोप है कि देवास, नीमच, उज्जैन, आगर-मालवा, सिंगरौली, शहडोल सहित प्रदेश के अन्य जिलों में स्वामित्व योजना से संबंधित कार्यों से असहमति जताने वाले पटवारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की गई है। संघ ने इन सभी कार्रवाइयों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। पटवारियों का कहना है कि यदि शासन ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
कानून के विपरीत काम कराने का लगाया आरोप
पटवारी संघ का कहना है कि शासन-प्रशासन द्वारा दबाव बनाकर ऐसे कार्य करवाए जा रहे हैं, जिन्हें लेकर पटवारियों को गंभीर आपत्ति है। संघ के अनुसार शासकीय भूमि के निष्पादन अथवा रजिस्ट्रीकरण से संबंधित कार्यों के लिए पटवारियों को संविधान अथवा संबंधित कानून में ऐसी कोई स्वतंत्र शक्ति प्राप्त नहीं है, फिर भी प्रशासनिक स्तर पर पटवारियों को शासकीय भूमि के निष्पादन से जुड़े कार्यों में जिम्मेदारी दी जा रही है।
पटवारियों का तर्क है कि कई ऐसी शासकीय भूमियां हैं, जिन पर पूर्व में ही पट्टे दिए जा चुके हैं और संबंधित व्यक्ति लंबे समय से उस भूमि पर काबिज हैं। राजस्व अभिलेखों में भी उनके नाम दर्ज हैं। ऐसी परिस्थितियों में भूमि के रजिस्ट्रीकरण एवं निष्पादन से संबंधित प्रक्रिया में हल्का पटवारी को जिम्मेदार बनाया जाना उचित नहीं है। संघ का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक सुधार किया जाना चाहिए।
स्वामित्व योजना के कार्यों का बहिष्कार
पटवारी संघ द्वारा स्वामित्व योजना के तहत भूमि के रजिस्ट्रीकरण एवं निष्पादन से जुड़े कार्यों का विरोध किया जा रहा है। संघ का कहना है कि उनकी मांग किसी व्यक्तिगत लाभ या सुविधा के लिए नहीं, बल्कि कानूनसम्मत प्रक्रिया सुनिश्चित करने और पटवारियों पर अनावश्यक जिम्मेदारी थोपे जाने से बचाने के लिए है।
इसी विरोध के चलते प्रदेश के कुछ जिलों में पटवारियों द्वारा इन कार्यों से दूरी बनाई गई। इसके बाद प्रशासन द्वारा कुछ पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने से मामला और गंभीर हो गया। संघ का आरोप है कि बातचीत और समस्या के कानूनी समाधान के बजाय दंडात्मक कार्रवाई के माध्यम से पटवारियों पर दबाव बनाया जा रहा है।
ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार, राजस्व कार्यों से विरत रहने का निर्णय
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बाघेला द्वारा जारी पत्र के अनुसार, प्रदेशभर के पटवारियों ने फिलहाल ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार करने तथा राजस्व से जुड़े कार्यों से विरत रहने का निर्णय लिया है। जिला मुख्यालयों पर सौंपे गए ज्ञापनों के माध्यम से शासन को पटवारियों की मांगों और आगामी आंदोलन की रूपरेखा से अवगत कराया गया है।
संघ ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से शुरू किया गया है, लेकिन यदि सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई वापस नहीं ली और किसी अन्य पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेश महामंत्री धर्मेन्द्र शर्मा का कहना कि योजना में पटवारी को निष्पादक बनाने के अलावा किसी अन्य बात का विरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि लीज डीड में पटवारी का नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति है, क्योंकि पटवारी टाइटल्ड नहीं है। शासकीय भूमि के निष्पादन का अधिकार राज्यपाल की ओर से अधिकृत अधिकारी को ही है। भविष्य में किसी तरह का विवाद होने पर पटवारियों को भी मामले में पक्षकार बनाया जा सकता है।
अभी पटवारी को 2100 रुपए का ग्रेड पे दिया जा रहा है, जबकि पंचायत सचिव को 2400 रुपए का ग्रेड पे मिलता है। संघ का आरोप है कि सरकार पटवारियों से अतिरिक्त काम करा रही है। इसलिए अब यह काम नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि, सीएम किसान सम्मान योजना और फार्मर आईडी योजना का काम कृषि विभाग से संबंधित है। संघ की मांग है कि ये काम भी उसी विभाग को सौंपे जाएं। इन्हीं मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति बनाई जा रही है।
कार्रवाई वापस नहीं हुई तो टोटल शटडाउन की चेतावनी
पटवारी संघ ने शासन को चेतावनी दी है कि यदि प्रदेशभर में की गई दंडात्मक कार्रवाइयों को शीघ्र वापस नहीं लिया गया और भविष्य में किसी पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की गई तो प्रदेश के सभी पटवारी टोटल शटडाउन करने के लिए बाध्य होंगे।
संघ का कहना है कि इसके बाद राजस्व विभाग से संबंधित कामकाज पर व्यापक असर पड़ सकता है और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी। पटवारियों ने शासन से मांग की है कि मामले को टकराव का रूप देने के बजाय संघ के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर विवाद का कानूनी एवं व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।
पटवारियों ने कहा—आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार
पटवारियों का कहना है कि वे शासन के साथ टकराव नहीं चाहते, लेकिन अपनी जायज मांगों और कानूनी अधिकारों को लेकर पीछे हटने वाले भी नहीं हैं। यदि शासन द्वारा उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आर-पार का आंदोलन किया जाएगा।
पटवारी संघ ने कहा है कि वर्तमान में ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार के साथ आंदोलन की शुरुआत की गई है। सरकार की ओर से शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलन का अगला चरण तय किया जाएगा। संघ ने प्रदेशभर के पटवारियों से एकजुट रहने और आंदोलन को शांतिपूर्ण एवं संगठित तरीके से आगे बढ़ाने का आह्वान किया है।
अब इस विवाद का केंद्र शासन और पटवारी संघ के बीच होने वाली बातचीत है। यदि सरकार दंडात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा कर संघ की कानूनी आपत्तियों पर चर्चा करती है तो गतिरोध समाप्त होने की संभावना है, अन्यथा आंदोलन के और व्यापक होने से प्रदेश के राजस्व कार्य प्रभावित हो सकते हैं।