मुख्यमंत्री से पटवारी संघ के पदाधिकारियों की मुलाकात के बाद राजस्व विभाग ने जारी किए निर्देश; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 218 के तहत अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का प्रावधान शामिल
भोपाल। मध्यप्रदेश में आबादी भूमि के स्वामित्व अधिकार अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया में पटवारियों को निष्पादक अधिकारी बनाए जाने के विरोध में चल रहे आंदोलन के बाद शासन ने इस संबंध में नया आदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पटवारी संघ के पदाधिकारियों की मुलाकात और सहमति बनने के बाद राजस्व विभाग ने 10 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर पूर्व में जारी निर्देशों में संशोधन किया है। इस आदेश को पटवारियों की प्रमुख मांगों और स्वामित्व योजना के तहत उनकी भूमिका को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग, मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल द्वारा जारी आदेश में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 64 तथा धारा 107(1)(ख) और मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू-सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख) नियम, 2020 का उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार, ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026’ के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा विधि अनुसार तैयार किए गए भू-अभिलेखों के आधार पर निष्पादन एवं पंजीयन की कार्यवाही कराए जाने का निर्णय लिया गया है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि शासन के 13 अगस्त 2026 के आदेश के तहत पटवारियों को राज्य शासन की ओर से निष्पादन हेतु निष्पादक अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसी व्यवस्था को लेकर पटवारी संघ ने आपत्ति जताई थी। संघ का कहना था कि आबादी भूमि के स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के निष्पादन की जिम्मेदारी पटवारियों को सौंपे जाने से उनके सामने कानूनी और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
धारा 218 के तहत अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का उल्लेख
शासन के नए आदेश का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु इसका तीसरा अनुच्छेद है। इसमें कहा गया है कि पहले बिंदु के अनुसार राज्य शासन की ओर से की गई निष्पादन संबंधी नियमानुसार कार्यवाही के संबंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 218 के तहत अभियोजन स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
इस प्रावधान का संबंध सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध अभियोजन चलाने के लिए आवश्यक स्वीकृति से है। सामान्यतः धारा 218 में निर्दिष्ट परिस्थितियों में, सरकारी कर्मचारी द्वारा आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में किए गए कथित अपराध के मामले में न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने से पहले सक्षम सरकार की स्वीकृति आवश्यक हो सकती है।
शासन के आदेश में इस कार्यवाही के संबंध में अभियोजन स्वीकृति नहीं देने की बात कही गई है। हालांकि, इसे पटवारियों को हर प्रकार के मुकदमे से पूर्ण कानूनी छूट मिलना नहीं माना जाना चाहिए। इस प्रावधान का दायरा आदेश में वर्णित कार्यवाही और लागू कानूनी शर्तों के अनुसार ही समझा जाएगा। यह आदेश सभी प्रकार के आरोपों, आपराधिक मामलों या अन्य कानूनी कार्यवाहियों पर स्वतः रोक लगाने की घोषणा नहीं करता।
17 सितंबर का आदेश भी तत्काल प्रभाव से अधिक्रमित
राजस्व विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह आदेश पूर्व में जारी आदेश क्रमांक 733/2026/सात-5, दिनांक 17 सितंबर 2026 को अधिक्रमित करते हुए तत्काल प्रभाव से जारी किया जा रहा है। इस तरह शासन ने स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के निष्पादन से संबंधित पूर्व निर्देशों के स्थान पर नया आदेश प्रभावी किया है।
आदेश पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार राजेश कुमार कोल, अवर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग के डिजिटल हस्ताक्षर दर्ज हैं। आदेश की तारीख 10 अक्टूबर 2026 है।
आंदोलन के बाद सहमति से निकला रास्ता
आबादी भूमि के स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के निष्पादन की जिम्मेदारी को लेकर पटवारियों की आपत्ति के बाद प्रदेश में विरोध और आंदोलन की स्थिति बनी थी। पटवारी संघ इस व्यवस्था में अपनी भूमिका तथा उससे जुड़ी कानूनी जवाबदेही को लेकर शासन के समक्ष अपना पक्ष रख रहा था।
इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पटवारी संघ के पदाधिकारियों की मुलाकात हुई। सहमति बनने के बाद 10 अक्टूबर को राजस्व विभाग का नया आदेश जारी हुआ। इससे पटवारियों की भूमिका, उनके आधिकारिक कार्यों और अभियोजन स्वीकृति से जुड़े विषयों पर शासन की स्थिति स्पष्ट करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
कुल मिलाकर, शासन के इस आदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के निष्पादन की प्रक्रिया को विधिक आधार देने के साथ-साथ संबंधित कार्यवाही के लिए BNSS की धारा 218 के तहत अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का प्रावधान किया गया है। पटवारी आंदोलन के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम है।