● नामांतरण के लिए रिश्वत लेते तहसील कार्यालय का कंप्यूटर ऑपरेटर ट्रैप
राजस्व विभाग में नामांतरण बंटवारा के लिए होने वाली कार्यवाही में अब परत दर परत खुलासा होने लगा है। पहले पटवारियों के पास नामांतरण/ संशोधन पंजी होने के कारण नामांतरण, बंटवारा के मामले में पटवारियों पर रिश्वत लेने के और भ्रष्टाचार करने के आरोप लगते रहे हैं। इसके साथ ही लोकायुक्त के ट्रैप केस मामलों में राजस्व विभाग से संबंधित अधिकतम नामांतरण, बंटवारा की कार्यवाही से ही होते थे जिसमें प्रायः पटवारी ही ट्रैप होते थे और पटवारियों के द्वारा प्रतिकार करते हुए कहा जाता था कि नामांतरण बंटवारा हमारा अधिकार नहीं तो फिर हम दोषी कैसे? किंतु जब से राजस्व विभाग में रेवेन्यू केस मैनेजमेंट सिस्टम (आर सी एम एस) लागू हुआ है तब से नामांतरण बंटवारा के मामलों में पटवारियों की ट्रैप हिस्ट्री मध्यप्रदेश में कम ही देखने को मिल रही है। आज ताजा मामले में तहसील के एक कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा नामांतरण करने और पावती (ऋण पुस्तिका) बनाने के एवज में ₹20000 की रिश्वत लेते लोकायुक्त में रंगे हाथों पकड़े जाने का मामला सामने आया है।
डीएसपी श्री बघेल के नेतृत्व में विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त इंदौर की ट्रैप कार्यवाही में आज आवेदक वीरेंद्र सितोलिया पिता फूल सिंह सितोलिया निवासी ग्राम दतोदा तहसील महू जिला इंदौर द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर तहसील कार्यालय टप्पा सिमरोल तहसील महू इंदौर में पदस्थ तरुण कुमरावत पिता श्री नंदकिशोर कुमरावत उम्र 27 वर्ष निवासी सिमरोल के द्वारा आवेदक के पैतृक भूमि के नामांतरण कराने एवं पावती बनवाने के एवज में आरोपी तरुण कुमरावत द्वारा ₹20000 रिश्वत की मांग की जा रही थी । आज दिनांक 17 अगस्त 2020 को आरोपी को ₹20000 की रिश्वत लेते हुए तहसील कार्यालय टप्पा सिमरोल में ट्रैप किया गया। भ्रष्टाचार निवारण संशोधित अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत कार्रवाई जारी है।