महिला का आरोप था कि डिप्टी कलेक्टर ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। सोरते के वकील ने मीडिया को यह भी बयान दिया कि महिला समय-समय पर परिवार के लिए लाखों रुपए सोरते से ले भी चुकी है।कोर्ट ने महिला से सवाल किया कि जब दुष्कर्म हुआ था तब प्रकरण दर्ज क्यों नहीं किया गया।वहीं महिला ने पुलिस थाने में की शिकायत में कहा था कि उसे पति की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। वह सोरते के अधिनस्त काम करती थी और इस दौरान डिप्टी कलेक्टर कई बार अपने घर पर भी काम के सिलसिले में बुलाते थे और मुझे शादी का वादा भी करने लगे।इतना ही नहीं, डिप्टी कलेक्टर ने राजस्थान के एक मंदिर में जाकर महिला की मांग में सिंदूर भी भरा था।इसके बाद सोरते का प्रमोशन हुआ और वे डिप्टी कलेक्टर बनकर भोपाल चले गए। इसके बाद वे माँ के बीमार होने का बहाना बनाने लगे। इसके बाद दो माह पूर्व वे शादी से मुकरे और बोले कि जहां शिकायत करना हो कर दो। फिलहाल, इस प्रकरण में इंदौर हाईकोर्ट के फैसले से डिप्टी कलेक्टर को राहत मिली है।