स्वामित्व योजना में सिस्टम की नाकामी का बोझ पटवारियों पर! हादसों ने खड़े किए गंभीर सवाल

स्वामित्व योजना में सिस्टम की नाकामी का बोझ पटवारियों पर! हादसों ने खड़े किए गंभीर सवाल


सर्वर की सुस्ती, अफसरों की सख्ती… दबाव में पटवारी, मानसिक दबाव में हो रहे दुर्घटना का शिकार

भोपाल/विदिशा/गंजबासौदा। स्वामित्व योजना के अंतर्गत पटवारियों को रजिस्ट्री संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद प्रदेश में राजस्व कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यदबाव और मानसिक तनाव का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। एक ओर ऑनलाइन पोर्टल और सर्वर की तकनीकी समस्याएं कर्मचारियों के काम में बाधा बन रही हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों द्वारा लगातार कार्य की प्रगति पूछने, लक्ष्य पूरा करने के निर्देश देने और कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने से पटवारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी बीच विदिशा जिले के गंजबासौदा क्षेत्र में पटवारी विक्रम वासवानी के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना ने कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, त्योंदा क्षेत्र में पदस्थ पटवारी विक्रम वासवानी 15 अक्टूबर को दुर्घटना का शिकार हो गए। प्रारंभिक सूचना में उन्हें सिरनोटा से एंबुलेंस के माध्यम से बासौदा अस्पताल लाए जाने की बात कही गई थी। 16 अक्टूबर को उनके बंसल अस्पताल भोपाल में भर्ती होने और उपचार के लिए तत्काल चार यूनिट रक्त की आवश्यकता होने की सूचना भी सामने आई। सहकर्मियों के अनुसार, दो यूनिट रक्त की व्यवस्था हो चुकी थी और अन्य साथियों से भी सहायता की अपील की गई थी। दुर्घटना के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे सीधे कार्यदबाव का परिणाम नहीं माना जा सकता। हालांकि, इस घटना के बीच पटवारियों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर कर्मचारियों की चिंताएं एक बार फिर सामने आई हैं।

दिनभर इंतजार, फिर भी एक-दो रजिस्ट्री ही हो पा रहीं

पटवारियों का कहना है कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत रजिस्ट्री संबंधी कामकाज में तकनीकी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। कहीं सर्वर ठीक से काम नहीं कर रहा, तो कहीं पोर्टल और सॉफ्टवेयर बेहद धीमी गति से चल रहे हैं। कई बार लॉगिन करने, आवश्यक जानकारी दर्ज करने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में ही काफी समय लग जाता है। ऐसे में कर्मचारी दिनभर मोबाइल लेकर के काम करने का प्रयास करते हैं, लेकिन इसके बावजूद एक दिन में केवल एक या दो रजिस्ट्री ही हो पाती हैं।

समस्या यह है कि तकनीकी बाधाओं के कारण काम की गति प्रभावित होने के बावजूद कर्मचारियों से निर्धारित समय में लक्ष्य पूरा करने की अपेक्षा की जा रही है। जब सर्वर ही साथ नहीं देता, तब कर्मचारी चाहकर भी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते। परिणामस्वरूप उनका समय, ऊर्जा और मानसिक क्षमता लगातार दबाव में रहती है।

पटवारियों का कहना है कि तकनीकी समस्या उनके नियंत्रण से बाहर है। इसके बावजूद काम में देरी होने पर जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की बात कहने से कर्मचारियों की परेशानी बढ़ जाती है। उनका सवाल है कि जब ऑनलाइन व्यवस्था ही सुचारु रूप से काम नहीं कर रही, तब केवल कर्मचारियों पर लक्ष्य पूरा करने का दबाव बनाना कितना व्यावहारिक है?

हर पल की जानकारी और लक्ष्य का दबाव

पटवारियों के अनुसार, काम की प्रगति जानने के लिए बार-बार फोन, संदेश और अन्य माध्यमों से जानकारी मांगी जाती है। कितनी रजिस्ट्री हुईं, कितना काम बाकी है और लक्ष्य कब तक पूरा होगा—ऐसे सवालों के बीच कर्मचारियों को लगातार जवाब देना पड़ता है। काम नहीं होने पर कार्रवाई की आशंका अलग बनी रहती है।

इस परिस्थिति में पटवारी एक साथ कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्हें तकनीकी समस्याओं से जूझना है, निर्धारित कार्य पूरा करने का प्रयास करना है, अधिकारियों को प्रगति की जानकारी देनी है और साथ ही अपने अन्य राजस्व दायित्वों का भी निर्वहन करना है। जब प्रयास करने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता, तो निराशा और तनाव बढ़ना स्वाभाविक है।

पटवारियों का कहना है कि किसी भी योजना को सफल बनाने के लिए केवल लक्ष्य निर्धारित करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए तकनीकी व्यवस्था का दुरुस्त होना, पर्याप्त समय मिलना और मैदानी कर्मचारियों को सहयोग देना भी आवश्यक है। यदि व्यवस्था में खामी है, तो उसका समाधान निकालने के बजाय कर्मचारियों को ही जवाबदेह ठहराने से समस्या और जटिल हो सकती है।

मानसिक उथल-पुथल के बीच वाहन चलाना भी बन सकता है जोखिम - लगातार काम का दबाव, अधूरे लक्ष्य की चिंता और कार्रवाई की आशंका व्यक्ति के मन को कई तरह की उलझनों में डाल सकती है। मानसिक थकान और एकाग्रता में कमी का असर दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, किसी दुर्घटना के पीछे वास्तविक कारणों का निर्धारण जांच के बाद ही किया जा सकता है, लेकिन कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा के बीच संबंध को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कर्मचारियों की परेशानी को केवल काम पूरा करने की क्षमता के रूप में देखने के बजाय उनकी कार्य परिस्थितियों और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी समझने की जरूरत है।

पटवारी संगठनों से जुड़े संदेशों में विदिशा जिले में पिछले तीन दिनों के दौरान तीन छोटी दुर्घटनाओं और एक गंभीर दुर्घटना की सूचना साझा किए जाने की बात कही गई है। इससे पहले नर्मदापुरम जिले में भी दो पटवारियों के गंभीर रूप से घायल होने की घटना का उल्लेख कर्मचारियों के बीच किया गया। इन घटनाओं के कारणों और उनके बीच किसी समान संबंध की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है, लेकिन लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं की सूचनाओं ने कर्मचारियों के बीच चिंता जरूर बढ़ाई है।

कर्मचारियों का सवाल—तकनीकी खामी की सजा पटवारी क्यों भुगतें? - पटवारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सर्वर और सॉफ्टवेयर की समस्या के कारण काम नहीं हो पा रहा, तब इसके लिए पटवारियों पर कार्रवाई का दबाव क्यों बनाया जा रहा है? उनका कहना है कि वे काम से पीछे नहीं हटना चाहते और योजना के कार्य को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन तकनीकी व्यवस्था सुचारु न होने पर केवल दबाव बढ़ाने से न तो काम की गति बढ़ेगी और न ही समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा। उनका मानना है कि ऑनलाइन व्यवस्था में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही, सर्वर की खराबी के दौरान कार्य की समय-सीमा और लक्ष्य की समीक्षा भी वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।

पटवारियों की समस्याओं को केवल कर्मचारी और अधिकारी के बीच का विवाद मानकर नहीं देखा जा सकता। यह तकनीकी व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। विक्रम वासवानी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के बीच अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी तकनीकी बाधाओं और कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से लें, ताकि कामकाज की अपेक्षाओं और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाया जा सके।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है—जब पटवारी काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन सर्वर और सॉफ्टवेयर साथ नहीं दे रहे, तो समाधान तकनीकी व्यवस्था सुधारने में खोजा जाएगा या पटवारियों पर दबाव बढ़ाकर उनसे ऐसे परिणामों की अपेक्षा की जाएगी, जिन्हें हासिल करना उनके नियंत्रण में ही नहीं है?

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