बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और तकनीकी समस्याओं के बीच काम का दबाव बढ़ने से कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को लेकर उठे सवाल, अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी
भोपाल/विजयपुर। मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के कार्यों को लेकर पटवारियों पर बढ़ते दबाव और कथित मानसिक प्रताड़ना के बीच विजयपुर तहसील से एक महिला पटवारी की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ने का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटवारी श्रीमती सरिता कुशवाह की तबीयत अचानक खराब होने के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
इस घटना ने स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के दौरान पटवारियों पर पड़ रहे कार्यभार, अधिकारियों के कथित दबाव और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, महिला पटवारी की तबीयत बिगड़ने का सटीक चिकित्सकीय कारण अभी स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं है। हालांकि पटवारी संगठनों ने स्वामित्व के काम का बहिष्कार पुनः किया है सरकार की वादाखिलाफी के कारण दो दिन पहले मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात के बाद सोमवार तक पटवारियों की मांग पर सरकारी आदेश जारी होने की संभावना को देखते हुए अधिकारियों की बातों में आकर कहीं कहीं पटवारियों ने काम शुरू कर दिया है।
तकनीकी खामियां, फिर भी काम पूरा करने का दबाव
पटवारियों से जुड़े लोगों का कहना है कि स्वामित्व योजना के ऑनलाइन पोर्टल और ऐप में लगातार तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। कभी सर्वर की परेशानी, कभी डेटा संबंधी त्रुटियां तो कभी अन्य तकनीकी बाधाओं के कारण काम समय पर पूरा करना मुश्किल हो रहा है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को तकनीकी समस्याओं के समाधान और पर्याप्त संसाधनों के बजाय काम पूरा करने के लिए दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
पटवारियों का आरोप है कि योजना के तहत जिम्मेदारियां सौंपते समय पर्याप्त प्रशिक्षण और विधिवत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा समय-सीमा में काम पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है। तकनीकी समस्याओं के बीच जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की आशंका से कर्मचारियों में तनाव बढ़ने की बात भी सामने आ रही है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
स्वामित्व योजना के कार्यों को लेकर पटवारी वर्ग में पहले से ही नाराजगी बताई जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि किसी भी सरकारी योजना का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है, जब संबंधित कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश, आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और व्यावहारिक परिस्थितियों के अनुरूप समय दिया जाए।
यदि पोर्टल और ऐप में लगातार गड़बड़ियां आ रही हैं, तो उनकी जिम्मेदारी केवल मैदानी कर्मचारियों पर डालना उचित नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में अधिकारियों को समस्याओं का समाधान करने और कर्मचारियों को सहयोग देने की आवश्यकता है। कर्मचारियों पर कथित तौर पर दबाव बनाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की आशंका के बीच काम कराने की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
मानसिक तनाव से स्वास्थ्य पर असर की आशंका
महिला पटवारी सरिता कुशवाह की तबीयत बिगड़ने की घटना ने कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर तनावपूर्ण परिस्थितियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पटवारी वर्ग में आशंका जताई जा रही है कि यदि काम का दबाव, तकनीकी परेशानियां और अधिकारियों की सख्ती इसी तरह जारी रही, तो अन्य कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अत्यधिक तनाव की स्थिति में गंभीर स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, इस मामले में महिला पटवारी की बीमारी और कथित कार्यदबाव के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध स्थापित होना अभी बाकी है, लेकिन घटना ने प्रशासन के सामने कर्मचारियों की कार्यस्थितियों की समीक्षा करने की जरूरत जरूर सामने रखी है।
प्रशिक्षण, तकनीकी सुधार और संवेदनशील कार्यप्रणाली की मांग
पटवारी वर्ग से जुड़े कर्मचारियों की मांग है कि स्वामित्व योजना के पोर्टल और ऐप की तकनीकी समस्याओं को प्राथमिकता से दूर किया जाए। योजना के कार्यों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण, स्पष्ट दिशा-निर्देश और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, काम की समय-सीमा निर्धारित करते समय वास्तविक परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए और कर्मचारियों के साथ अनावश्यक दबाव या कथित प्रताड़ना की शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो।
सवाल यह है कि जब योजना के ऑनलाइन सिस्टम में ही लगातार समस्याएं आ रही हैं, तो उसकी जिम्मेदारी का पूरा बोझ मैदानी कर्मचारियों पर क्यों डाला जाए? सरकारी योजनाओं की सफलता कर्मचारियों से काम लेने के साथ-साथ उन्हें जरूरी संसाधन, प्रशिक्षण और सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराने पर भी निर्भर करती है। विजयपुर की महिला पटवारी की गंभीर स्थिति के बीच अब प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर सबकी नजरें टिकी हैं। कहीं ऐसा ना हो कि पटवारी अब इस तरह अधिकारियों के मानसिक दबाव और तनाव के कारण फिर आंदोलन को उतर आए।