बकाया किसी और का, कनेक्शन काट दिया नियमित बिल भरने वाले व्यापारी का; विभाग के रवैये पर उठे गंभीर सवाल
हरदा। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (एमपीईबी) की कथित मनमानी और तानाशाहीपूर्ण कार्यप्रणाली के खिलाफ गुरुवार को शहर के व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। नियमित रूप से बिजली बिल जमा करने वाले प्रतिष्ठित व्यापारी एवं रेडीमेड संगठन के अध्यक्ष सुनील छाबड़ा की दुकान 'परी कलेक्शन' का बिजली कनेक्शन विभाग ने उस आधार पर काट दिया कि उसी परिसर के एक अन्य किराएदार का वर्ष 2024 से बिजली बिल बकाया था।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि परी कलेक्शन का बिजली बिल पूरी तरह जमा था और उसके नाम पर कोई बकाया नहीं था, इसके बावजूद विभागीय अमले ने कार्रवाई करते हुए बिजली आपूर्ति बंद कर दी।
मोहलत मांगी, फिर भी नहीं सुनी बात
व्यापारी सुनील छाबड़ा ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से अनुरोध किया कि उन्हें सोमवार तक का समय दिया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संबंधित किराएदार और मकान मालिक से बात कर बकाया राशि जमा कराने में सहयोग करेंगे। लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी और नियमों का हवाला देकर बिजली काट दी।
'एक का बिल बकाया तो पूरे परिसर की बिजली काट सकते हैं'
मामले की जानकारी कैट (कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) के जिला अध्यक्ष सरगम जैन को दी गई। उन्होंने विधायक प्रतिनिधि संजय जैन के साथ विभाग के डीई से चर्चा की, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। व्यापारियों का आरोप है कि डीई ने यह कहते हुए कार्रवाई को सही ठहराया कि यदि एक परिसर में चार किराएदार हैं और उनमें से किसी एक का बिल बकाया है तो पूरे परिसर के सभी कनेक्शन काटे जा सकते हैं।
जीएम कार्यालय से भी नहीं मिली राहत
इसके बाद व्यापारी संघ के प्रतिनिधि विद्युत मंडल के महाप्रबंधक (जीएम) से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे, लेकिन वे मौजूद नहीं मिले। फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ मिला। इससे व्यापारियों में नाराजगी और बढ़ गई।
कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद लौटी बिजली
जब विभागीय स्तर पर कोई समाधान नहीं निकला तो कैट जिला अध्यक्ष सरगम जैन एवं अन्य व्यापारी जिला कलेक्टर से मिले और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल विद्युत विभाग के अधिकारियों से चर्चा की और नियमित बिलधारक व्यापारी का बिजली कनेक्शन तुरंत बहाल करने के निर्देश दिए। इसके बाद दुकान की बिजली दोबारा चालू कराई गई।
व्यापारियों ने बताया कानून का उल्लंघन
व्यापारियों का कहना है कि विद्युत विभाग की यह कार्रवाई विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा-56 की भावना के विपरीत है। उनका दावा है कि कानून के अनुसार केवल उसी उपभोक्ता का कनेक्शन विच्छेद किया जा सकता है, जिसके नाम पर बकाया हो। किसी अन्य उपभोक्ता को उसके पड़ोसी या दूसरे किराएदार के बकाया के कारण दंडित करना न्यायसंगत नहीं है।
शहरभर के व्यापारियों में रोष
इस घटना के बाद शहर के व्यापारियों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि नियमित बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं के साथ भी ऐसा व्यवहार होगा तो कोई भी व्यापारी सुरक्षित नहीं रहेगा। व्यापारियों ने विभाग की कार्यप्रणाली की जांच कराने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा भविष्य में इस प्रकार की मनमानी रोकने की मांग की है।