रविवार को आयोजन के पांचवें दिन प्रातःकाल रिद्धि-सिद्धि मंत्रों के मंगलोच्चार के साथ भगवान श्रीजी का अभिषेक किया गया। इसके पश्चात विधि-विधानपूर्वक श्री नंदीश्वर द्वीप मंडल विधान प्रारंभ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने गहन श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ अर्जित किया।
जैन समाज के कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि जैन धर्म में श्री नंदीश्वर द्वीप मंडल विधान का विशेष महत्व है। यह विधान मुख्य रूप से अष्टाह्निका पर्व, जो वर्ष में तीन बार आने वाला आठ दिनों का महापर्व है, के दौरान संपन्न किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नंदीश्वर द्वीप मध्यलोक का आठवां द्वीप है, जहां 52 शाश्वत अकृत्रिम जिनालय और अनंत जिनबिंब विराजमान हैं। इन दिव्य जिनालयों में देवगण स्वयं भगवान जिनेंद्र की पूजा-अर्चना करते हैं। मनुष्य लोक में श्रद्धालु मंडल विधान के माध्यम से भावपूर्वक उन्हीं शाश्वत जिनालयों की आराधना कर आध्यात्मिक पुण्य अर्जित करते हैं।
उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस विधान के अनुष्ठान से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है, पापकर्मों का क्षय होता है तथा अष्टाह्निका व्रत के समान महान पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही यह साधक के मन में सम्यक दर्शन, अटूट श्रद्धा और धर्म के प्रति दृढ़ आस्था का संचार करता है।मंदिर परिसर में प्रतिदिन आयोजित हो रहे इस धार्मिक अनुष्ठान में समाज के महिला-पुरुष, युवा एवं बच्चे उत्साहपूर्वक भाग लेकर भक्ति और आराधना का वातावरण निर्मित कर रहे हैं।