इधर, मध्यप्रदेश में निर्माणाधीन इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेजी से कार्य चल रहा है। हाईवे के आसपास के क्षेत्रों में कई लोग भविष्य की व्यावसायिक संभावनाओं को देखते हुए जमीन खरीदने और निर्माण की योजना बना रहे हैं। कुछ स्थानों पर निर्माण गतिविधियां भी शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में यदि समय रहते प्रशासन ने लोगों को नियमों की जानकारी नहीं दी और सुरक्षा सीमा स्पष्ट नहीं की, तो आगे चलकर विवाद की स्थिति बन सकती है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अनियोजित निर्माण दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनते हैं। सड़क पर सीधे प्रवेश और निकास, अनियंत्रित पार्किंग, ढाबों और दुकानों की भीड़ तथा अतिक्रमण के कारण यातायात प्रभावित होता है और हादसों की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि विभिन्न राज्यों में हाईवे सुरक्षा को लेकर नियमों को लगातार सख्त किया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इंदौर-बैतूल हाईवे पर अभी निर्माण कार्य जारी है, इसलिए यही सबसे उपयुक्त समय है जब प्रशासन, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राजस्व विभाग संयुक्त रूप से लोगों को जागरूक करें। हाईवे की सुरक्षा सीमा का सीमांकन किया जाए, सूचना बोर्ड लगाए जाएं और ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग अनजाने में प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण न करें।
जानकारों का मानना है कि यदि हाईवे बनने के बाद नियमों के उल्लंघन पर निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाती है, तो लोगों को आर्थिक नुकसान होगा और इससे जनआक्रोश भी पैदा हो सकता है। इसलिए विकास कार्यों के साथ-साथ लोगों को समय रहते नियमों की जानकारी देना और उनका पालन सुनिश्चित कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
राजस्थान का उदाहरण यह बताता है कि सड़क सुरक्षा और सुनियोजित विकास के लिए समय रहते उठाए गए कदम भविष्य के विवादों और नुकसान को रोक सकते हैं। ऐसे में इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी अभी से जागरूकता और नियोजन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि विकास के साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।