पटवारी संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि तीन पटवारियों की बर्खास्तगी से प्रदेश के करीब 25 हजार पटवारियों की भावनाओं को ठेस पहुंची थी। उनका आरोप है कि इसके बाद अन्य स्थानों पर भी पटवारियों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई होने लगी, जिससे असंतोष और बढ़ा। संगठन ने इसे अपने सम्मान और सेवा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया था।
कलेक्टर ऋतुराज का तबादला, पटवारियों की बर्खास्तगी से प्रदेशभर में भड़का था आक्रोश
देवास में तीन पटवारियों की सेवा समाप्ति के बाद आंदोलन ने पकड़ा था जोर, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद वापस हुई थीं कार्रवाई। मध्यप्रदेश शासन ने 27 अक्टूबर को जारी प्रशासनिक आदेश में देवास कलेक्टर ऋतुराज का तबादला करते हुए उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव पदस्थ किया है। स्वामित्व योजना के तहत पटवारियों को निष्पादक अधिकारी बनाए जाने के मुद्दे पर प्रदेशभर में हुए विवाद के दौरान देवास में तीन पटवारियों की सेवा समाप्ति को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ था। ऐसे में कलेक्टर के तबादले को लेकर पटवारी संगठन के बीच चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, शासन के तबादला आदेश में इस फैसले को पटवारी आंदोलन से जोड़ने का कोई उल्लेख नहीं है।
तीन पटवारियों की बर्खास्तगी से शुरू हुआ था विरोध
स्वामित्व योजना के अंतर्गत पटवारियों को संपत्ति पंजीयन प्रक्रिया में निष्पादक अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपे जाने का प्रदेशभर में विरोध हुआ था। पटवारियों का कहना था कि इस जिम्मेदारी के कारण भविष्य में कानूनी विवादों और मुकदमों में फंसने का खतरा हो सकता है। इसी बीच देवास में तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने के बाद विरोध ने उग्र रूप ले लिया।
पटवारियों ने देवास कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रदर्शन किया और ‘कलेक्टर मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। प्रदर्शन में देवास सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में पटवारी शामिल हुए। इस कार्रवाई को पटवारी संगठन ने अपने साथियों के खिलाफ अन्याय बताते हुए प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी थी।
25 हजार पटवारियों की भावनाओं को ठेस पहुंचने का दावा
पटवारी संगठन से जुड़े लोगों का कहना था कि तीन साथियों की बर्खास्तगी से प्रदेश के करीब 25 हजार पटवारियों की आत्मसम्मान की भावना को ठेस पहुंची। उनका आरोप था कि स्वामित्व योजना में निष्पादक अधिकारी की जिम्मेदारी को लेकर उठाई गई आपत्तियों के बीच बर्खास्तगी की कार्रवाई ने कर्मचारियों में भय और असंतोष पैदा किया।
आंदोलन के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में पटवारियों ने विरोध प्रदर्शन किए और शासन से कार्रवाई वापस लेने की मांग की। विवाद का प्रमुख मुद्दा यह था कि योजना के तहत सरकारी प्रक्रिया का पालन करते हुए काम करने वाले पटवारियों को कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद निकला रास्ता
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के स्तर पर पटवारी प्रतिनिधियों से चर्चा हुई। इसके बाद सरकार ने स्वामित्व योजना के कार्यों में पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने संबंधी आदेश जारी किया। पटवारी संगठन की ओर से बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई वापस लेने की मांग भी उठाई गई थी।
अब 27 अक्टूबर को जारी नए प्रशासनिक आदेश में देवास कलेक्टर ऋतुराज को सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव बनाया गया है। इस घटनाक्रम के बाद पटवारी संगठन के बीच पुराने विवाद की चर्चा फिर शुरू हो गई है। संगठन से जुड़े लोगों की प्रतिक्रिया है कि कर्मचारियों की आवाज और उनके सम्मान से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। हालांकि तबादला आदेश में ऋतुराज के स्थानांतरण का कारण नहीं बताया गया है।