जानकारी के अनुसार शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेशों के बाद अधिकांश विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों को जिला प्रशासन ने समय पर भारमुक्त कर दिया, लेकिन पटवारियों के मामले में अब तक निर्णय नहीं लिया गया है। इससे प्रभावित पटवारी रोजाना कलेक्ट्रेट और राजस्व कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि शासन के आदेश के बावजूद उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा, जिससे वे असमंजस की स्थिति में हैं।
सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन का तर्क है कि जिले में पहले से ही पटवारियों की कमी है। ऐसे में सभी स्थानांतरित पटवारियों को एक साथ भारमुक्त करने से राजस्व कार्य प्रभावित हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि कलेक्टर स्तर से इस संबंध में शासन को पत्र लिखने की बात कही जा रही है, ताकि आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त हो सकें।
दूसरी ओर प्रभावित पटवारियों का कहना है कि जब शासन ने स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए हैं तो उन्हें समय पर भारमुक्त करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। अनावश्यक देरी से न केवल उनकी नई पदस्थापना प्रभावित हो रही है, बल्कि पारिवारिक और आर्थिक कठिनाइयां भी बढ़ रही हैं। कई पटवारी नए जिले में आवास, बच्चों की पढ़ाई और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी असमंजस में हैं।
स्थानांतरित पटवारियों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द भारमुक्त किए जाने की मांग की है, ताकि वे शासन के आदेश का पालन करते हुए अपने नए कार्यस्थल पर समय पर योगदान दे सकें।