स्थानीय लोगों के अनुसार, कई स्थानों पर मवेशी सड़क के बीचों-बीच बैठे रहते हैं या फिर आपस में लड़ते-झगड़ते हुए अचानक वाहनों के सामने आ जाते हैं। ऐसे में चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाते और दुर्घटनाएं हो जाती हैं। विगत एक सप्ताह में इस मार्ग पर लगातार हादसे सामने आए हैं, जिससे वाहन चालकों में भय का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में बिना दूध देने वाले एवं बेसहारा मवेशियों को खुला छोड़ दिया जाता है। इन मवेशियों के लिए चारे और संरक्षण की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वे भोजन की तलाश में हाईवे पर पहुंच जाते हैं। यही मवेशी सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहे हैं। कई बार दुर्घटनाओं में मवेशियों की भी मौत हो जाती है, जबकि वाहन चालकों को गंभीर चोटें आती हैं और वाहनों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
हैरानी की बात यह है कि लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। न तो आवारा मवेशियों को पकड़कर गौशालाओं में पहुंचाने की स्थायी व्यवस्था दिखाई दे रही है और न ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में कोई विशेष निगरानी की जा रही है।
क्षेत्रवासियों और नियमित रूप से इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि हरदा से हंडिया के बीच हाईवे पर विचरण कर रहे आवारा मवेशियों को तत्काल हटाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बेसहारा मवेशियों के संरक्षण के लिए प्रभावी योजना लागू की जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हरदा-हंडिया के बीच का यह मार्ग आगे भी गंभीर सड़क हादसों का कारण बनता रहेगा।