घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक अभिजीत शाह तत्काल विद्यालय पहुंचे। मौके पर आग तेजी से फैलती देख और गैस सिलेंडर को गर्मी की चपेट में आता देखकर उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझा। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विधायक आग और धुएं के बीच अंदर पहुंचे तथा गैस सिलेंडर को वहां से हटाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सफलता हासिल की।
आग के बीच सिलेंडर हटाने से टला बड़ा खतरा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद विद्यालय में मौजूद शिक्षक, कर्मचारी और ग्रामीण बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुट गए थे। इसी दौरान आग के समीप मौजूद गैस सिलेंडर सबसे बड़ा खतरा बना हुआ था।
ऐसे समय में विधायक अभिजीत शाह ने जोखिम उठाते हुए सिलेंडर को आग की चपेट से बाहर निकालने का प्रयास किया। सिलेंडर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद विद्यालय में मौजूद बच्चों, शिक्षकों और आसपास के लोगों पर मंडरा रहा संभावित खतरा काफी हद तक टल गया।
यदि आग के बीच गैस सिलेंडर में विस्फोट हो जाता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। समय रहते उठाए गए इस कदम से राहत एवं बचाव कार्य को भी आगे बढ़ाने में मदद मिली।
265 बच्चों की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता
आग लगने की सूचना मिलते ही विद्यालय में मौजूद बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का प्रयास शुरू कर दिया गया। घटना के दौरान अभिभावकों और ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल रहा। हालांकि राहत की बात यह रही कि विद्यालय में मौजूद सभी बच्चे सुरक्षित रहे और किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है।
बच्चों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने के बाद अभिभावकों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने भी संकट की घड़ी में समय पर की गई कार्रवाई की सराहना की।
विधायक बोले- बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण
घटना के बाद विधायक अभिजीत शाह ने कहा कि उस समय उनके सामने केवल बच्चों की सुरक्षा का सवाल था। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में यह सोचना जरूरी था कि बच्चों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
उन्होंने कहा, “उस समय यह नहीं सोचा कि मेरे साथ क्या हो सकता है। सामने स्कूल के बच्चे थे और मन में सिर्फ एक ही बात थी कि किसी भी बच्चे को कुछ नहीं होना चाहिए।”
ग्रामीणों ने की साहसिक प्रयास की सराहना
घटना के बाद ग्रामीणों, शिक्षकों और अभिभावकों ने विधायक के साहसिक प्रयास की सराहना की। लोगों का कहना था कि आग और धुएं के बीच जाकर गैस सिलेंडर को सुरक्षित स्थान पर ले जाना जोखिम भरा काम था, लेकिन समय रहते उठाए गए कदम से संभावित बड़ा खतरा टल गया।
ग्राम खुदिया की यह घटना संकट की घड़ी में तत्परता, साहस और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का उदाहरण बन गई। आग पर समय रहते नियंत्रण पाने और सभी बच्चों के सुरक्षित रहने से घटना का अंत राहत भरा रहा।
हालांकि, घटना के बाद विद्यालय में आग लगने के कारणों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में स्कूलों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से किसी बड़े खतरे को रोका जा सके।