सर्पदंश और डूबने से हुई मौत के मामलों में शैलेन्द्र बड़ोनिया की त्वरित कार्रवाई, पांच परिवारों को मिलेंगे 4-4 लाख रुपए
हरदा, 10 सितंबर 2026। हादसों में अपनों को खो चुके पांच परिवारों के लिए प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित राहत की कार्रवाई की है। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व टिमरनी शैलेन्द्र बड़ोनिया ने दुर्घटना में मृत्यु के पांच प्रकरणों में मृतकों के वैध वारिसों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, कुल 20 लाख रुपए, स्वीकृत की है। सहायता राशि के देयक भी तैयार कर कोषालय में प्रस्तुत कर दिए गए हैं।
एसडीएम की इस त्वरित कार्रवाई से संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल मिलने की राह आसान हुई है। स्वीकृत पांच प्रकरणों में तीन मौतें सर्पदंश से, जबकि दो मौतें पानी में डूबने से हुई थीं।
सर्पदंश से तीन मौत, परिजनों को 12 लाख की सहायता
सर्पदंश से मृत्यु के तीन मामलों में मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। इनमें कायदा निवासी सुभाष पिता लालसिंह की मृत्यु के मामले में उनके वैध वारिस पिता लालसिंह पिता छोटेलाल को 4 लाख रुपए की सहायता स्वीकृत हुई है।
इसी प्रकार कैली निवासी गोलम बागमारे पिता सुखराम की मृत्यु के मामले में उनकी पत्नी दुर्गा बागमारे तथा मोगराढाना, तहसील रहटगांव निवासी जसोदा पत्नी सीताराम यादव की मृत्यु के मामले में उनके पति सीताराम पिता सालकराम यादव को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मंजूर की गई है।
पानी में डूबने से हुई मौत, दो परिवारों को 8 लाख रुपए
पानी में डूबने से हुई दो मौतों के मामलों में भी प्रशासन ने राहत राशि स्वीकृत की है। उन्द्राकच्छ निवासी रेवाराम पिता घासीराम की मृत्यु के मामले में उनके भाई राजनाथ पिता घासीराम निवासी इंदौर तथा कुमरूम, तहसील रहटगांव निवासी सुखराम पिता रोहना काजले की मृत्यु के मामले में उनके वैध वारिस शंकर पिता सुखराम निवासी कुमरूम को 4-4 लाख रुपए की सहायता स्वीकृत की गई है।
देयक तैयार, कोषालय में भेजे
एसडीएम शैलेन्द्र बड़ोनिया ने बताया कि पांचों प्रकरणों में नियमानुसार कार्रवाई पूरी करते हुए चार-चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता के देयक जनरेट कर कोषालय में प्रस्तुत कर दिए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि स्वीकृत सहायता राशि पात्र परिवारों तक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शीघ्र पहुंच सके।
हादसे में अपनों को खो चुके परिवारों के लिए आर्थिक सहायता भले ही अपूरणीय क्षति की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन संकट के समय प्रशासन की यह त्वरित पहल प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहारा देने में महत्वपूर्ण साबित होगी।