हरदा/कन्नौद/इंदौर (सार्थक जैन)।
सड़क अधूरी है... गड्ढे पूरे हैं... लेकिन टोल पूरा लिया जा रहा है! नेशनल हाईवे की बदहाल स्थिति और अधूरे निर्माण के बीच जारी टोल वसूली ने आम वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा दी है। वर्ष 2018 में शुरू हुए सड़क निर्माण कार्य को 2026 तक भी पूरी तरह पूरा नहीं किया जा सका है। दूसरी ओर, जिन हिस्सों पर वाहन दौड़ रहे हैं, उनमें कई जगह सड़क उखड़ने और गड्ढे होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
जनता के इसी दर्द को लेकर जागरूक नागरिक शांति जैसानी ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को ई-मेल भेजकर पूरे मामले में हस्तक्षेप और जांच की मांग की है।
शांति जैसानी ने केंद्रीय मंत्री को भेजे ई-मेल में सवाल उठाया है कि जब नेशनल हाईवे का निर्माण अभी तक पूर्ण नहीं हुआ, कई हिस्सों में सड़क खराब हो चुकी है और यात्रियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तो हरदा और कन्नौद के पास टोल वसूली क्यों जारी है?
जनता का सीधा सवाल है—
“टोल पूरा लिया जा रहा है तो सड़क भी पूरी और गुणवत्तापूर्ण क्यों नहीं?”
वाहन चालक टोल देने के बावजूद गड्ढों और खराब सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। ऐसे में टोल वसूली की व्यवस्था और सड़क निर्माण की गुणवत्ता दोनों सवालों के घेरे में हैं।
कन्नौद के पास हरदा-इंदौर मार्ग पर बरबईखेड़ा टोल प्लाजा को लेकर भी शिकायत में गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
बताया गया है कि इस मार्ग पर कई जगह सर्विस रोड का काम अभी पूर्ण नहीं हुआ है। इसके साथ ही सड़क को बार-बार खोदे जाने और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी वाहन चालकों में नाराजगी है।
यदि सड़क निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है तो कुछ ही समय में सड़क की हालत खराब होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी है? और यदि निर्माण अभी अधूरा है तो टोल वसूली का आधार क्या है? ये सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
बैतूल-हरदा मार्ग पर टेमागांव और गवासेन के बीच सड़क पर गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच अचानक आने वाले गड्ढे दुर्घटना का खतरा बढ़ा रहे हैं।
सवाल यह भी है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क यदि जल्द ही खराब होने लगे तो निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और संबंधित विभाग की जवाबदेही तय कौन करेगा?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। जानकारी के अनुसार चापड़ा के पास एक और इंदौर से करीब 6-7 किलोमीटर पहले एक अन्य टोल प्लाजा प्रस्तावित है।
इंदौर के पास वाला टोल बारिश के बाद आगामी समय में शुरू किए जाने की बात सामने आ रही है।
यानी आने वाले समय में वाहन चालकों को इस मार्ग पर एक के बाद एक टोल का बोझ उठाना पड़ सकता है। ऐसे में जनता का सवाल है कि नए टोल शुरू करने से पहले क्या मौजूदा सड़कों की गुणवत्ता, अधूरे निर्माण और यात्रियों को उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की जाएगी?
वाहन चालकों का कहना है कि टोल देना समस्या नहीं है, लेकिन टोल के बदले सुरक्षित, सुगम और गुणवत्तापूर्ण सड़क मिलना उनका अधिकार है।
अधूरी सड़क, गड्ढे, अधूरे सर्विस रोड और बार-बार खुदाई के बीच टोल वसूली से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
जागरूक नागरिक शांति जैसानी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मांग की है कि पूरे मार्ग की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। सड़क निर्माण की गुणवत्ता, कार्य पूर्ण होने की स्थिति, टोल वसूली के नियम और अधूरे सर्विस रोड की स्थिति की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
साथ ही उन्होंने अधूरे निर्माण को शीघ्र पूरा कराने और खराब सड़कों की मरम्मत कराने की मांग की है।
1. वर्ष 2018 में शुरू हुआ काम 2026 तक पूरा क्यों नहीं हुआ?
2. हाईवे अधूरा और जगह-जगह खराब है तो टोल वसूली क्यों?
3. बरबईखेड़ा टोल प्लाजा शुरू करने से पहले क्या सभी सुविधाएं पूरी की गईं?
4. सड़क निर्माण के कुछ समय बाद गड्ढे होने पर जिम्मेदारी किसकी?
5. नए टोल शुरू करने से पहले पुराने मार्ग की गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं?
सड़क पर रोज सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों की नजर अब इस शिकायत पर सरकार की कार्रवाई पर है। जनता चाहती है कि सिर्फ टोल वसूली नहीं, बल्कि सड़क की गुणवत्ता और निर्माण की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो।
क्योंकि सवाल सिर्फ गड्ढों का नहीं है—सवाल जनता की सुरक्षा और उसके पैसे का है।