टिमरनी(संदीप अग्रवाल)। पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर प्रगति उदित जैन ने 11 उपवास की कठिन तपस्या कर आत्मशुद्धि, संयम और त्याग का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी इस तपस्या पर तारण-तरण दिगंबर जैन समाज, टिमरनी द्वारा श्रीफल भेंट कर सम्मानपूर्वक अनुमोदना की गई। महिला मंडल की सदस्यों ने भी तपस्वी के तप-त्याग की सराहना करते हुए अनुमोदना की।
वर्तमान में टिमरनी में बाल ब्रह्मचारी संत वैराग्यानंद जी महाराज का चातुर्मास भी धर्ममय वातावरण में चल रहा है। महाराजश्री के सान्निध्य में प्रतिदिन धार्मिक आयोजन, प्रवचन एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से समाजजनों को संयम, साधना, त्याग और आत्मकल्याण का संदेश दिया जा रहा है। ऐसे आध्यात्मिक वातावरण में प्रगति जैन की 11 उपवास की तपस्या ने समाज में धर्म और तप की भावना को और मजबूत किया है।
तपस्वी प्रगति जैन ने लगातार 11 दिनों तक उपवास रखकर आत्मसंयम, दृढ़ इच्छाशक्ति और आध्यात्मिक साधना का परिचय दिया। जैन धर्म में तपस्या को कर्मों की निर्जरा और आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। तप और त्याग व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी अपने संकल्प पर अडिग रहने की प्रेरणा देते हैं।
समाजजनों ने कहा कि धर्म में तप, त्याग और तपस्या ही मनुष्य के संकल्प को दृढ़ बनाते हैं तथा आत्मबल को मजबूत करते हैं। प्रगति जैन की तपस्या न केवल उनके व्यक्तिगत आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है, बल्कि समाज के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर जैन समाज एवं महिला मंडल की ओर से तपस्वी की तपस्या की खूब-खूब अनुमोदना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं निरंतर धर्म साधना की मंगलकामना की गई।