प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुरैना ग्रामीण तहसील क्षेत्र के मुरैना गांव के पटवारी हल्के में पदस्थ पटवारी प्रदीप शर्मा से किसान मुरारीलाल कुशवाह अपनी दो बीघा कृषि भूमि का सीमांकन कराना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने तहसीलदार कार्यालय में आवेदन देकर सीमांकन की मांग की थी। आवेदन पर तहसीलदार ने सीमांकन के आदेश जारी करते हुए राजस्व निरीक्षक और पटवारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
35 हजार से शुरू हुई मांग, 25 हजार में तय हुआ सौदा
आरोप है कि सीमांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पटवारी प्रदीप शर्मा ने किसान से 35 हजार रुपये की मांग की। किसान ने अपनी आर्थिक परेशानी बताते हुए इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, लेकिन पटवारी कम राशि लेने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद बातचीत में 25 हजार रुपये देने की बात तय हुई। किसान ने यह रकम किश्तों में देने की बात कही। रिश्वत की मांग से परेशान होकर किसान ने लोकायुक्त पुलिस से शिकायत कर दी।
शिकायत के सत्यापन के बाद तहसील कार्यालय में दबिश
किसान की शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन किया और मंगलवार को कार्रवाई की योजना बनाई। निरीक्षक बलराम सिंह राजावत के नेतृत्व में लोकायुक्त की टीम मुरैना तहसील कार्यालय पहुंची। यहां कार्रवाई के दौरान पटवारी प्रदीप शर्मा को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया गया।
कार्रवाई के बाद लोकायुक्त पुलिस की टीम आरोपी पटवारी को पहले कोतवाली लेकर पहुंची और इसके बाद सर्किट हाउस में आगे की वैधानिक कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई के दौरान निरीक्षक उपेंद्र दुबे सहित हेमंत शर्मा, जसवंत शर्मा, नेतराम, प्रमोद तोमर, धीरज नागर, विनोद शाक्य और अंकुश शर्मा समेत लोकायुक्त पुलिस के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी पर फिर उठे सवाल
इस कार्रवाई ने एक बार फिर राजस्व विभाग में आम लोगों के कामकाज को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जमीन का सीमांकन, नामांतरण और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए किसानों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में यदि निर्धारित शासकीय प्रक्रिया के तहत होने वाले कामों के लिए भी रिश्वत की मांग की जाती है तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल है।