फसल बीमा, ई-केवाईसी, फार्मर आईडी, नामांतरण और राजस्व सेवाएं प्रभावित; हरदा में कृषि उपज मंडी में धरना जारी
हरदा। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर जिले के सभी पटवारी 3 अगस्त से अपने-अपने हल्कों का प्रभार, बस्ता एवं शासकीय अभिलेख संबंधित तहसीलों में जमा कर अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के पहले दिन से ही जिला पटवारी संघ ने स्थानीय कृषि उपज मंडी परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जिले की सभी तहसीलों के पटवारी धरना स्थल पर एकत्र होकर शासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और वर्षों से लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि पटवारियों ने पहले चरणबद्ध आंदोलन के तहत काली पट्टी बांधकर कार्य किया, शासकीय व्हाट्सएप समूहों का बहिष्कार किया तथा ऑनलाइन कार्यों का भी बहिष्कार किया था। इसके बावजूद शासन स्तर पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। संघ का कहना है कि राजस्व मंत्री, राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं शासन को कई बार ज्ञापन सौंपने के बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते प्रदेशभर के पटवारियों को अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि पटवारी राजस्व विभाग की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। गांव-गांव में किसानों से जुड़े अधिकांश कार्य पटवारियों के माध्यम से ही पूरे होते हैं, लेकिन लगातार बढ़ते कार्यभार के बावजूद वर्षों से उनकी सेवा संबंधी मांगें लंबित हैं। ऐसे में मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ रहा है।
किसानों की बढ़ी परेशानी
पटवारियों की हड़ताल का सबसे अधिक असर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों पर दिखाई देने लगा है। खरीफ सीजन के बीच किसान फसल बीमा, ई-केवाईसी, ई-टॉकन, खाद वितरण, फार्मर आईडी, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े रिकॉर्ड सत्यापन, जाति, आय एवं निवास प्रमाण पत्रों के लिए आवश्यक राजस्व प्रतिवेदन, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, गिरदावरी, खसरा-खतौनी की प्रतिलिपि तथा अन्य राजस्व कार्यों के लिए तहसीलों और पटवारी हल्कों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण अधिकांश कार्य लंबित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि कृषि कार्यों के महत्वपूर्ण समय में राजस्व सेवाएं बाधित होने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
12 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित
हड़ताल के कारण राजस्व विभाग की 12 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इनमें ई-टेकन, वेब जीआईएस, रिकॉर्ड अपडेट, सारा पोर्टल, सारा एप्लिकेशन, आरसीएमएस, सीएम हेल्पलाइन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े रिकॉर्ड सत्यापन, रिकॉर्ड स्कैनिंग, राजस्व वसूली, फार्मर रजिस्ट्रेशन तथा लघु सिंचाई गणना जैसे कार्य शामिल हैं।
इसके अलावा नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, खसरा-खतौनी, गिरदावरी, अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई, कब्जा दिलाना, प्राकृतिक आपदा सर्वे, कानून-व्यवस्था से जुड़े राजस्व दायित्व एवं अन्य मैदानी कार्य भी पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
वर्षों से लंबित हैं मांगें
पटवारी संघ का कहना है कि लगातार नई-नई योजनाओं का क्रियान्वयन, ऑनलाइन पोर्टलों पर कार्य, सर्वे, किसान हित की योजनाएं और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां पटवारियों को सौंपी जा रही हैं, लेकिन उनके वेतनमान, पदोन्नति और सेवा सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।
संघ की प्रमुख मांगों में पटवारी कैडर रिव्यू लागू करना, पदोन्नति पद के अनुरूप समयमान वेतनमान देना, लंबित नायब तहसीलदार विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित करना, जज प्रोटेक्शन एक्ट की तर्ज पर विधिक संरक्षण प्रदान करना, अतिरिक्त कार्यों का युक्तिकरण कर उचित पारिश्रमिक देना, विभिन्न योजनाओं का लंबित मानदेय भुगतान, पारदर्शी एवं कर्मचारी हितैषी स्थानांतरण नीति लागू करना तथा वर्षों से लंबित सभी मांगों का शीघ्र निराकरण शामिल है।
वेतन विसंगति भी आंदोलन का प्रमुख कारण
संघ के अनुसार वर्तमान में पटवारियों की नियुक्ति ₹2100 ग्रेड पे पर होती है, जबकि नियुक्ति के समय ₹2400 ग्रेड पे दिया जाना चाहिए। वहीं 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर प्रथम समयमान ₹2400 के स्थान पर ₹2800 ग्रेड पे (राजस्व निरीक्षक के समकक्ष) किए जाने की मांग लंबे समय से लंबित है। संघ का कहना है कि राजस्व विभाग में सबसे अधिक मैदानी जिम्मेदारी और जवाबदेही पटवारियों पर होने के बावजूद उन्हें अपेक्षित वेतनमान और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
प्रांतीय उपाध्यक्ष राजीव जैन ने शासन से मांग की है कि जनहित एवं किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पटवारियों की न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि पटवारी भी नहीं चाहते कि किसानों और आम नागरिकों को परेशानी हो, लेकिन लंबे समय से अनदेखी के कारण आंदोलन करना उनकी मजबूरी बन गया है। जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी।