कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष राजकुमारी मुकाती ने की। इस दौरान शैल छालोत्रे, डॉ. स्मिता मोरखले, रीमा मोरखले, नीतू बांके, सरला बांके, सरोज पुनासे, प्रतिभा बिजगावने, नैना बागरे, प्रियंका मोरखले, वैशाली गुर्जर, इशिता चौधरी, ज्योति पाटिल एवं विशाखा बांके का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन आराधना पटलया ने किया।
सकारात्मक सोच से बनता है बच्चों का व्यक्तित्व
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. स्मिता मोरखले ने कहा कि शिक्षा के साथ बच्चों में अच्छे संस्कार होना भी बेहद जरूरी है। सकारात्मक सोच बच्चों के व्यक्तित्व को निखारती है और उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को तनाव से बचाने के लिए मां का लगातार जुड़ाव जरूरी है। बच्चे अपनी परेशानी और उलझन खुलकर बता सकें, इसके लिए घर में संवाद का सकारात्मक माहौल होना चाहिए। समय रहते समस्या को समझकर बच्चों को सही दिशा दी जा सकती है।
मां की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की पहली गुरु मां होती है। बच्चे के भविष्य निर्माण में मां की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। मां द्वारा दिए गए संस्कार, व्यवहार और सकारात्मक सोच का प्रभाव बच्चे के पूरे व्यक्तित्व पर पड़ता है। इसलिए बच्चों के साथ संवाद, समय और समझ का रिश्ता मजबूत करना जरूरी है।
कार्यक्रम में दुर्गा आंजने, सुलेखा भायरे, लाजवंती पाटिल, सरोज मोरखले, सुनीता पाटिल, यज्ञश्री टाले, राजश्री खरे, अनीता आंजने, संगीता गुर्जर, रंजना पटेल, मौसम पाटिल, अर्वितिका टाले एवं निहारिका छालोत्रे सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। कार्यक्रम में शिक्षिकाओं के सम्मान के साथ मातृत्व, संस्कार और बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर सार्थक संदेश दिया गया।