नायब तहसीलदार की मौजूदगी में चार सदस्यीय गार्ड ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर
हरदा। नगर के वरिष्ठ समाजसेवी, प्रखर वक्ता एवं पूर्व विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) अध्यक्ष शिवनारायण टांक का रविवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार से पहले नायब तहसीलदार की मौजूदगी में चार सदस्यीय गार्ड ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी। टांक के मीसा बंदी रहे होने के कारण उन्हें राजकीय सम्मान दिया गया।
शनिवार, 12 सितंबर 2026 को लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे शिवनारायण टांक का निधन हो गया था। उनके निधन की खबर मिलते ही नगर में शोक की लहर दौड़ गई। नगरवासी उन्हें स्नेह और सम्मान से ‘काका जी’ के नाम से संबोधित करते थे।
रविवार सुबह निज निवास से उनकी अंतिम यात्रा निकली। अंतिम यात्रा में विधायक आरके दोगने, पूर्व मंत्री कमल पटेल, पूर्व विधायक संजय शाह, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सुरेंद्र जैन सहित भाजपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल हुए। बड़ी संख्या में नगरवासियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
जनसंघ से भाजपा तक सक्रिय रहे
शिवनारायण टांक जनसंघ, जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय सदस्य रहे। विभिन्न दायित्वों पर रहते हुए उन्होंने लंबे समय तक जनसेवा की। वे हरदा के विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) के अध्यक्ष भी रहे। सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने के साथ ही अपनी स्पष्टवादिता, प्रखर वक्तृत्व शैली और बेबाक व्यक्तित्व के लिए उनकी नगर में अलग पहचान थी।
मीसा बंदी रहे थे 'काकाजी'
आपातकाल के दौर में शिवनारायण टांक मीसा बंदी रहे थे। सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान और इस पृष्ठभूमि को देखते हुए उनके अंतिम संस्कार के दौरान राजकीय सम्मान दिया गया। नायब तहसीलदार की मौजूदगी में चार सदस्यीय गार्ड द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति
टांक के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि शिवनारायण टांक का जाना हरदा के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने स्पष्ट विचारों और जनसेवा के माध्यम से नगर में अलग पहचान बनाई थी।
शिवनारायण टांक अपने पीछे पुत्र उत्तम चंद्र, स्वर्गीय सुभाष चंद्र, प्रकाश चंद्र (एडवोकेट) और महेश चंद्र टांक सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।