तेज धूप और गर्मी के बावजूद किसानों का उत्साह कम नहीं हुआ। हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई यात्रियों को पैदल अपने गंतव्य तक जाना पड़ा। प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया है तथा किसानों से लगातार बातचीत की जा रही है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका था।
15 दिनों से जारी है आंदोलन
आम किसान यूनियन सहित विभिन्न किसान संगठन पिछले करीब 15 दिनों से मूंग खरीदी नीति के विरोध में आंदोलनरत हैं। किसानों का आरोप है कि राज्य सरकार समर्थन मूल्य पर केवल 1 क्विंटल 20 किलोग्राम मूंग प्रति एकड़ खरीद रही है, जबकि एक किसान के खेत में इससे कई गुना अधिक उत्पादन होता है। किसानों का कहना है कि यह व्यवस्था उनके साथ अन्याय है और सरकार को कम से कम 5 क्विंटल प्रति एकड़ मूंग की खरीदी सुनिश्चित करनी चाहिए।
किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार ज्ञापन दिए, प्रदर्शन किए और सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया, लेकिन कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। मजबूर होकर अब उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतरकर अनिश्चितकालीन आंदोलन करना पड़ रहा है।
"हम भीख नहीं, अपना हक मांग रहे हैं" – लक्ष्मी नारायण पवार
चक्का जाम स्थल पर किसानों को संबोधित करते हुए किसान नेता लक्ष्मी नारायण पवार ने सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "जब हम 41 से 45 डिग्री की कड़ी धूप में खेतों में मूंग काट सकते हैं, तो 28-30 डिग्री तापमान में हाईवे पर क्यों नहीं बैठ सकते? हम किसी से भीख नहीं मांग रहे, हम अपना हक मांग रहे हैं। मध्यप्रदेश में हरदा का किसान सबसे मजबूत है।"
उन्होंने किसानों से आंदोलन को और मजबूत बनाने की अपील करते हुए कहा कि जो किसान दिन में किसी कारणवश नहीं आ सकते, वे रात में धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को मजबूती दें।
कई संगठनों और किसान नेताओं का मिला समर्थन
आंदोलन को विभिन्न सामाजिक एवं किसान संगठनों का भी समर्थन मिला। धरना स्थल पर करणी सेना जिलाध्यक्ष सुनील सिंह राजपूत, ग्राहक पंचायत समिति अध्यक्ष जौहरी कमल सोनी, किसान नेता महेंद्र सिंह जाट उर्फ जीवन गोदारा (अहलवाड़ा) सहित बड़ी संख्या में किसान नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने राज्य सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों की मेहनत और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। सभी ने एक स्वर में किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए आंदोलन को न्याय की लड़ाई बताया।
हाईवे पर टेंट, भोजन की व्यवस्था और रातभर धरना
दोपहर में शुरू हुआ चक्का जाम देर रात तक जारी रहा। किसानों ने हाईवे पर ही टेंट लगाकर स्थायी धरना शुरू कर दिया। आंदोलन स्थल पर किसानों के भोजन और रात्रि विश्राम की भी व्यवस्था की गई। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा किसान बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल रहे। दूसरी ओर भीषण गर्मी के कारण ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी पेड़ों की छांव में राहत लेते दिखाई दिए।
सरकार पर उपेक्षा का आरोप
आम किसान यूनियन समिति के सदस्य सुनील गोल्या ने बताया कि संगठन 2 जुलाई से लगातार आंदोलन कर रहा है। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया, 10 जुलाई को सांकेतिक चक्का जाम भी किया गया, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। अब जिलेभर के किसानों ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू किया है।
यूनियन के जिला उपाध्यक्ष गणेश पटेल ने कहा कि जब तक सरकार प्रति एकड़ 5 क्विंटल मूंग खरीदी का निर्णय नहीं लेती, तब तक किसान पीछे नहीं हटेंगे।
प्रशासन बोला—बातचीत जारी है
हरदा के एसडीएम अशोक कुमार डहेरिया ने बताया कि किसानों के साथ पिछले कई दिनों से लगातार बातचीत चल रही है। प्रशासन शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है और उम्मीद है कि वार्ता के माध्यम से जल्द कोई रास्ता निकल सकता है।
किसानों की प्रमुख मांगें
- समर्थन मूल्य पर कम से कम 5 क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी सुनिश्चित की जाए।
- किसानों की शत-प्रतिशत मूंग की खरीदी की जाए।
- खाद वितरण व्यवस्था में सुधार किया जाए।
- फसल बीमा से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।
- किसानों के हित में एमएसपी गारंटी कानून लागू किया जाए।
किसानों का संदेश
हरदा के किसानों का कहना है कि यह आंदोलन केवल मूंग खरीदी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों के सम्मान, उनकी मेहनत और उनके अधिकारों की लड़ाई है। उनका कहना है कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
फिलहाल इंदौर–नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। प्रशासन और किसान नेताओं के बीच वार्ता का दौर जारी है, जबकि पूरे प्रदेश की नजर अब इस आंदोलन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।