सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और घायल छात्राओं को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजकर उपचार शुरू कराया। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली जा रही है। घायलों की स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।
जर्जर स्कूल भवनों पर फिर खड़े हुए सवाल
इस घटना ने जिले के सरकारी स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर डूब क्षेत्र के कई विद्यालय वर्षों से मरम्मत और रखरखाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भवनों की खराब हालत को लेकर समय-समय पर शिकायतें और मांगें उठती रही हैं, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से मासूम बच्चों की सुरक्षा लगातार खतरे में बनी हुई है।
क्या समय रहते हो सकती थी रोकथाम?
प्राथमिक दृष्टि से यह घटना स्कूल भवन के रखरखाव और नियमित निरीक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यदि भवन की समय पर तकनीकी जांच, मरम्मत या आवश्यक सुधार कार्य कराए गए होते, तो संभवतः इस तरह की दुर्घटना टाली जा सकती थी। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों के रखरखाव की व्यवस्था की भी परीक्षा है।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो
शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय यदि स्वयं असुरक्षित हो जाएं, तो यह चिंता का विषय है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा देना शासन और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जर्जर भवनों में पढ़ाई कर रहे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सर्वे, तकनीकी परीक्षण और आवश्यक मरम्मत कार्य तत्काल कराए जाने चाहिए।
प्रशासन ने शुरू की जांच
घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। अधिकारियों द्वारा स्कूल भवन की स्थिति का निरीक्षण किया जा रहा है तथा हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
(समाचार लगातार अपडेट किया जा रहा है। प्रशासन की जांच रिपोर्ट, घायल छात्राओं की स्थिति और आगे की कार्रवाई से संबंधित जानकारी उपलब्ध होते ही समाचार को अपडेट किया जाएगा।)