बैठक में कृषि विभाग के डायरेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि किसानों के हित में जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार से मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने की मांग की है, जिस पर उच्च स्तर पर चर्चा चल रही है। सरकार का प्रयास है कि केन्द्र से अतिरिक्त कोटा स्वीकृत कराकर खरीदी की मात्रा बढ़ाई जाए।
बैठक के दौरान आम किसान यूनियन के नेता करण चौधरी ने खरीदी की निर्धारित मात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि गत वर्ष 7.73 लाख मीट्रिक टन मूंग का उपार्जन 4.80 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से किया गया था। इस वर्ष केन्द्र सरकार पहले ही 4.50 लाख मीट्रिक टन का कोटा स्वीकृत कर चुकी है, जबकि पंजीकृत रकबा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत कम है। ऐसे में गणना के अनुसार प्रति एकड़ लगभग 2.80 क्विंटल खरीदी होना चाहिए, लेकिन राज्य सरकार ने मात्र 1.20 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा किस आधार पर तय की, इसका संतोषजनक उत्तर अधिकारी नहीं दे सके।
बैठक में अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि खरीफ 2025 की लंबित फसल बीमा राशि अगले 7 से 8 दिनों के भीतर किसानों के खातों में जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके अलावा ई-विकास (e-Vikas) प्रणाली में आ रही तकनीकी समस्याओं का शीघ्र समाधान कर किसानों को उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दिया गया।
आम किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 3 से 4 दिनों के भीतर किसानों के हित में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो मंगलवार को यूनियन की बैठक बुलाकर आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी तथा विरोध प्रदर्शन की घोषणा की जाएगी।