टेमागांव में हुआ भव्य स्वागत, 20 वर्षों से जारी है रात्रि विश्राम और भंडारे की परंपरा
हरदा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर खंडवा स्थित प्रसिद्ध धूनी वाले दादाजी के दरबार में निशान चढ़ाने के लिए पांढुर्णा जिले से निकली करीब 25 से 30 श्रद्धालुओं की पदयात्रा शनिवार शाम टेमागांव पहुंची। लगभग 310 किलोमीटर की इस धार्मिक यात्रा में श्रद्धालु पैदल चलकर दादाजी के दरबार पहुंचेंगे और गुरु पूर्णिमा के दिन निशान अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना करेंगे।
टेमागांव में सामाजिक कार्यकर्ता आनंद राजपूत एवं सुभाष शास्त्री के निवास पर यात्रियों का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया। यहां श्रद्धालुओं के रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई। विशेष पूजा-अर्चना एवं आरती के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें करीब 1500 से 2000 श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
तीन पीढ़ियों से निभाई जा रही आस्था की परंपरा
पांढुर्णा जिले से धूनी वाले दादाजी के दरबार तक निकाली जाने वाली यह पद-रथ यात्रा वर्षों पुरानी परंपरा है। तीन पीढ़ियों से श्रद्धालु पूरे विश्वास और आस्था के साथ लगभग 310 किलोमीटर की यात्रा भजन-कीर्तन और सत्संग करते हुए पूरी करते आ रहे हैं। यात्रा मार्ग में पड़ने वाले गांवों और शहरों में श्रद्धालुओं का जगह-जगह स्वागत एवं सत्कार किया जाता है।
20 वर्षों से टेमागांव में होता है रात्रि विश्राम
टेमागांव में आनंद राजपूत एवं सुभाष शास्त्री के निवास पर पिछले लगभग 20 वर्षों से इस धार्मिक यात्रा का रात्रि विश्राम कराया जा रहा है। यहां हर वर्ष भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और विशाल भंडारे का आयोजन होता है। रविवार सुबह नित्य पूजन के बाद ग्रामीणों ने श्रद्धाभाव से रथ को खींचकर यात्रा को आगे के लिए रवाना किया। इस दौरान घर के नन्हे बालक लव और कुश ने भी रथ की डोर थामकर कुछ दूरी तक पैदल चलकर अपनी आस्था का परिचय दिया।