ACB के डीजी गोविंद गुप्ता के अनुसार, एक परिवादी ने शिकायत दी थी कि जमीन की फाइनल डिक्री जारी करने के बदले रिश्वत मांगी जा रही है। शुरुआत में एक लाख रुपये की मांग की गई, जिसे बाद में 60 हजार पर तय किया गया।
शिकायत के सत्यापन के बाद ACB ने ट्रैप प्लान किया। 16 अप्रैल 2026 को जैसे ही कार्यालय में रिश्वत की रकम सौंपी गई, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। जांच में यह भी सामने आया कि रिश्वत की रकम रीडर के जरिए क्लर्क तक पहुंचाई जा रही थी।
कार्रवाई के दौरान ACB को आरोपियों के पास से करीब 4 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी भी मिली है। इस पूरे मामले से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और आगे की जांच जारी है।

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