मानवीय संवेदना और प्रेरणा की अनूठी मिसाल
हरदा । जिले के ग्राम गहाल की निवासी श्रीमती रामकुंवर बाई ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी ऐसा कार्य कर दिखाया, जिसने पूरे समाज को भावुक कर दिया। उनके निधन के बाद जहां एक ओर शोक की लहर थी, वहीं दूसरी ओर उनके देहदान के निर्णय ने उन्हें अमर बना दिया।उनकी अंतिम यात्रा से पहले हरदा पुलिस द्वारा पूरे सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया—यह सम्मान न सिर्फ उनके जीवन के प्रति आदर था, बल्कि उनके महान निर्णय को भी सलाम था। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में ग्रामीण व आसपास के लोग मौजूद रहे।
🌼 अंतिम यात्रा बनी जनसैलाब
रामकुंवर बाई की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों ने शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। हर आंख नम थी, लेकिन गर्व भी उतना ही था कि उन्होंने मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का रास्ता चुना।
💖 देहदान: मृत्यु के बाद भी जीवन का संचार
जीते-जी लिया गया उनका देहदान का संकल्प, उनके बेटों ने पूरी श्रद्धा के साथ पूरा किया। उनका पार्थिव शरीर भोपाल के एम्स अस्पताल भेजा गया, जहां यह चिकित्सा छात्रों के अध्ययन और मानव सेवा में उपयोगी होगा।
👨⚕️ प्रशासन और समाज का सराहनीय सहयोग
जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संस्था “ग्राम पुकार फेडरेशन” के प्रयासों से डॉक्टरों की टीम गांव पहुंची और पूरी प्रक्रिया सम्मानपूर्वक सम्पन्न हुई।
🏅 समाज के लिए प्रेरणा
रामकुंवर बाई का यह कदम समाज के लिए एक संदेश है—जीवन खत्म हो सकता है, लेकिन मानवता नहीं। देहदान जैसे निर्णय न केवल चिकित्सा क्षेत्र को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि कई जिंदगियों में उम्मीद की रोशनी भी जगाते हैं।
🙏 नम आंखों से विदाई, गर्व से भरा सम्मान
उनकी विदाई सिर्फ एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक कहानी बन गई—एक ऐसी कहानी, जो आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा का पाठ पढ़ाएगी।

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