राजेन्द्र पटेल ने पर्चा जारी कर स्पष्ट रूप से कहा है कि यह आंदोलन किसी एक संगठन या व्यक्ति का नहीं, बल्कि सभी किसानों के अस्तित्व, सम्मान और अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। “जब तक समस्या का समाधान नहीं, तब तक मोर्चा समाप्त नहीं” के संकल्प के साथ किसानों को एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया गया है।
आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में किसानों पर दर्ज पराली (नलवाई) जलाने के प्रकरणों को समाप्त करना और समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी को प्रभावी ढंग से लागू करना शामिल है। किसानों का कहना है कि कई बार पंजीयन और स्लॉट बुकिंग जैसी प्रक्रियाओं में जटिलताओं के कारण उन्हें अपनी उपज समर्थन मूल्य से कम दाम पर बेचनी पड़ती है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे किसानों को मुआवजा देने की भी मांग की गई है।
किसानों ने यह भी मांग उठाई है कि मंडियों में पूरे वर्ष सरकारी खरीदी एजेंसियों की सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी किसान को अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े। साथ ही खरीदी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने की आवश्यकता बताई गई है।
सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी किसानों ने गंभीर चिंता जताई है। नहरों की नियमित सफाई, पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था और जल वितरण की पारदर्शी प्रणाली लागू करने की मांग की गई है, ताकि हर खेत तक समय पर पानी पहुंच सके। इसके अलावा गंजाल मोरे सिंचाई परियोजना को शीघ्र पूर्ण करने और प्रभावित किसानों को न्यायपूर्ण मुआवजा व पुनर्वास देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
किसानों ने खाद वितरण व्यवस्था को सरल बनाने पर जोर देते हुए कहा है कि वर्तमान में लंबी लाइनों और अनियमित आपूर्ति के कारण किसानों का समय और श्रम दोनों बर्बाद हो रहा है। पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही भूसे की जिलाबंदी, ट्रैक्टर-ट्रॉली से जुड़े खनन प्रतिबंध जैसे प्रशासनिक आदेशों की समीक्षा कर उन्हें व्यवहारिक बनाने की मांग भी रखी गई है। किसानों का कहना है कि इन नियमों के कारण उनकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
बिजली विभाग द्वारा मनमाने ढंग से जारी किए जा रहे बिलों और अनियमित विद्युत आपूर्ति को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया है। किसानों ने मांग की है कि निर्धारित समय पर बिना बाधा बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और अवैध वसूली पर रोक लगाई जाए।
आंदोलन के आयोजकों ने जिलेभर के किसानों से अपील की है कि वे अपनी जायज मांगों के समर्थन में एकजुट होकर 28 अप्रैल को हरदा पहुंचें और इस आंदोलन को सफल बनाएं, ताकि शासन-प्रशासन तक उनकी आवाज मजबूती से पहुंच सके और समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सके।


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