पटवारियों ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़ी प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताते हुए बताया कि वर्ष 2019 के आधार पर पात्र किसानों का पंजीयन पहले ही किया जा चुका है, लेकिन अब खातेदारों की मृत्यु के बाद वारिसों का रजिस्ट्रेशन सेल्फ मोड से किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पटवारी आईडी की कोई भूमिका नहीं है और न ही स्टेटस देखने की सुविधा उपलब्ध है। इसके बावजूद उनसे “शेष नहीं होने का प्रमाण पत्र” मांगा जाना अव्यवहारिक और अन्यायपूर्ण है।
इसके अलावा, स्कैनिंग प्रमाण पत्र की मांग को लेकर भी पटवारियों ने असंतोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि ऐसे दस्तावेजों का सत्यापन उनके कार्यक्षेत्र से बाहर है, जिससे उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि लघु सिंचाई संगणना और कृषि संगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का मानदेय अब तक लंबित है। साथ ही अवकाश के दिनों में ट्रेनिंग और मीटिंग के लिए बुलाए जाने पर भी नाराजगी जताई गई।
पटवारियों ने हाल ही में सागर और अशोक नगर में सड़क दुर्घटनाओं में दो पटवारियों की मौत तथा रतलाम में एक पटवारी की कथित आत्महत्या की घटनाओं का जिक्र करते हुए गहरा असंतोष व्यक्त किया। संघ ने मांग की है कि विसंगतिपूर्ण प्रमाण पत्र की मांग तत्काल बंद की जाए, लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए और अवकाश के दिनों में प्रशिक्षण एवं बैठकों पर रोक लगाई जाए।
इस दौरान तहसील अध्यक्ष कटनी नगर राजेश दुबे सहित बड़ी संख्या में पटवारी उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से नंदलाल ताम्रकार, अभिषेक तिवारी, गुलजारी लाल कोल, श्यामाचरण शुक्ला, अभिषेक जैन, नितेश पाण्डे, मदन मोहन राय, धर्मेंद्र ताम्रकार, चंदन असाटी, भूपेन्द्र सिंह पटेल, विनीत सिंह बघेल, संदीप गर्ग, रामगोपाल यादव, राबिया बानो, किरन सेन, नीलम उईके और अंजली जैन शामिल रहे।

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