हक की लड़ाई में अन्नदाता किसानों का जोरदार प्रदर्शन, विधायक आर. के. दोगने किसान बन हुए आंदोलन में शामिल
हरदा। जिले में किसानों का “घेरा डालो-डेरा डालो” आंदोलन तेजी पकड़ता जा रहा है। विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। पहले ही दिन से किसानों की भारी भागीदारी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है और हालात संवेदनशील होते जा रहे हैं। किसनों द्वारा पहले दौर की वार्ता में एसडीएम को वापस लौटा दिया और कमिश्नर से सीधे बात करने की अपनी बात रखी इसके बाद देर शाम मौके पर पहुंचे कमिश्नर के समक्ष विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात बात रखी गई है। आंदोलन में स्थानीय विधायक आर.के.दोगने भि किसान बन हुए शामिल ।
आंदोलन के तहत जिलेभर से आए किसानों ने सड़कों पर डेरा डाल दिया है। जानकारी के अनुसार, 2000 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ किसान प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे, जिससे कई मार्गों पर लंबा जाम लग गया और पूरे इलाके में आंदोलन का असर साफ नजर आया। ट्रैक्टरों की लंबी कतारों ने प्रशासन और आमजन दोनों का ध्यान आकर्षित किया।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए चर्चा के लिए पहुंचे एसडीएम को वापस लौटा दिया। किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे अब स्थानीय अधिकारियों से कोई बातचीत नहीं करेंगे और सीधे कमिश्नर स्तर पर ही संवाद करेंगे। आंदोलन स्थल पर कमिश्नर के पहुंचने पर किसानों ने उनसे सीधी बातचीत भी की और अपनी मांगों को मजबूती से रखा।
किसानों की प्रमुख मांगों में मूंग, मक्का और चना जैसी फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा, किसानों ने यह भी मांग उठाई है कि सैटेलाइट सर्वे सत्यापन की प्रक्रिया के कारण उन्हें समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में जो समस्याएं आ रही हैं, उनका तुरंत समाधान किया जाए और सभी पात्र किसानों का गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। किसान बिना लिखित आश्वासन के आंदोलन सै हटाने को तैयार नहीं है ।
किसानों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश हुए हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानो ने शाम को सामूहिक भोजन आंदोलन स्थल पर ही बनाया ।
वहीं, प्रशासन स्थिति को नियंत्रित रखने और किसानों से संवाद स्थापित करने के प्रयास कर रहा है। बढ़ती भीड़ और आंदोलन के विस्तार को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है और पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और इस आंदोलन का समाधान कैसे निकलता है।

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